कांग्रेस के एक दिग्गज नेता ने बीएसएफ से बर्खास्त किए गए तेज बहादुर का समर्थन किया है और सस्पेंशन का विरोध करते हुए उन्होंने बड़ी बात कही।
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मनीष तिवारी
- फोटो : AmarUjala
दरअसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने खराब खाने की शिकायत करने वाले जवान तेज बहादुर यादव की बर्खास्तगी का विरोध किया है। उनका कहना है कि तेज बहादुर ने बीएसएफ की भोजन व्यवस्था की खामियों को सामने लाने की कोशिश की थी, लेकिन उसे नहीं सुना गया। तेज बहादुर ने जवानों की समस्या उठाकर देश की सेवा की है, ऐसे में उसे बर्खास्त करना गलत है।
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Manish Tiwari
- फोटो : Amar ujala
मनीष तिवारी का कहना है कि सरकार एक तरफ पारदर्शिता को लेकर प्रतिबद्ध होने का दावा करती है, दूसरी तरफ व्यवस्था में बदलाव के लिए खामियों को उजागर करने वालों के साथ ऐसा बर्ताव करती है। दूसरी ओर तेज बहादुर का कहना है कि खराब खाने का वीडियो वायरल होने के बाद बीएसएफ में जवानों के भोजन की क्वालिटी में सत्तर फीसदी का सुधार हुआ है लेकिन घालमेल करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी।
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तेज बहादुर यादव घर पहुंच गए
तेज बहादुर ने कहा कि कार्रवाई होने से इससे सेना और अर्धसैनिक बलों के भीतर होने वाले भ्रष्टाचार पर लगाम लगती। अनुशासनहीनता समेत अन्य मामलों में बीएसएफ से बर्खास्तगी के बाद पहली बार मीडिया से मुखातिब तेजबहादुर ने आरोप लगाया कि सेना में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि दिल्ली में परेड के दौरान जवानों को खुद के पैसों से वर्दी और जूते भी खरीदने पड़ते हैं, जिससे देश का सिर ऊंचा रहे।
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तेज बहादुर यादव घर पहुंच गए
तेजबहादुर ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि भविष्य में जवानों के पक्ष में आवाज उठाते रहेंगे। तेजबहादुर बर्खास्तगी के खिलाफ हाईकोर्ट में अर्जी डालने सुबह ही दिल्ली रवाना हो गए। कोर्ट के फैसले पर तेजबहादुर ने कहा कि बर्खास्तगी की पहले से ही उम्मीद थी। अब बर्खास्तगी के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। वहीं कहा कि वीडियो वायरल होने के बाद से हर समय जान का खतरा मंडरा रहा था।
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तेज बहादुर
तेज बहादुर ने कहा कि नजरबंद करने के साथ ही मोबाइल भी छीन लिए गए। घर पर बात भी नहीं होने दी। इसके बाद पत्नी ने दिल्ली में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद उन्हें काफी राहत मिली। एक घंटे खेलने को भी मिलता था। इस दौरान भी उन पर नजर रखी जाती थी। धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि वह पहले शख्स हैं जो आवाज उठाकर भी जिंदा लौटे हैं।
उन्होंने कहा कि बीएसएफ में चालीस फीसदी हष्ट-पुष्ट जवानों को अधिकारियों ने अपने सहायक के तौर पर लगा रखे हैं। यही नहीं बीएसएफ में राशन की भी तीन कैटेगरी हैं। जेसीओ, ऑफिसर्स के लिए अच्छा जबकि जवानों के लिए सबसे घटिया राशन मिलता था। बेटे को भी रक्षा क्षेत्र में भेजे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर उसकी इच्छा हुई तो जरूर सेना में भेजेंगे।