इस बच्चे को देखिए, इसके शरीर में जन्म से ही बेहद जरूरी अंग नहीं था। जब डॉक्टरों को इसका पता चला तो वे भी दंग रह गए, लेकिन उन्होंने एक सर्जरी करके इतिहास रच दिया, जानिए मामला।
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Robotic Surgery
पीजीआई चंडीगढ़ में यह अनोखी और गजब की सर्जरी हुई। इसके साथ ही पीजीआई की उपलब्धियों में एक और तमगा जुड़ गया है। दो दिन के नवजात की फूड पाइप (भोजन नली) मिसिंग थी, जिस कारण वह फीड (दूध) नहीं ले पा रहा था। सेक्टर-16 हॉस्पिटल में जन्मे बच्चे को पीजीआई रेफर किया गया। इसके बाद पीजीआई की पीडियाट्रिक सर्जरी टीम ने रोबोटिक सर्जरी की मदद से नवजात की फूड पाइप ठीक करके उसे नया जीवन दिया।
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- फोटो : amar ujala
यह एशिया का पहला ऐसा केस है, जिसमें दो दिन के बच्चे की रोबोटिक सर्जरी की गई। पीजीआई में इस तरह के केस आते रहते हैं, लेकिन इतनी कम उम्र के नवजात पर रोबोटिक सर्जरी का इस्तेमाल पहली बार किया गया है। नवजात पूरी तरह से ठीक है और उसे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई है। सेक्टर-34 में रहने वाले एक सिक्योरिटी गार्ड के नवजात ने जब सेक्टर-16 हॉस्पिटल में जन्म लिया तो वह स्तनपान ही नहीं कर पा रहा था।
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डाक्टरों ने चेक किया तो पता चला कि उसकी फूड पाइप (खाने की नली) में कुछ दिक्कत है, जिसकी वजह से वह स्तनपान नहीं कर पा रहा। नवजात को पीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई की पीडियाट्रिक सर्जरी की टीम ने बच्चे की जांच की और पाया कि फूड पाइप बीच में से अलग है। इस कारण वह स्तनपान नहीं कर पा रहा। उसके बाद बच्चे की सर्जरी करने का फैसला लिया गया। मेडिकल भाषा में इसे एसोफेजियल एट्रेसिया कहते हैं।
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- फोटो : social media
टीम में शामिल विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चे की खाने की नली पूर्ण रूप रूप से विकसित नहीं हुई थी, जबकि बच्चे का वजन करीब ढाई किलो था। पीजीआई में इस मर्ज के हर साल 200-250 केस आते हैं। किसी की सर्जरी ओपेन होती है तो किसी की दूरबीन विधि से। दरअसल, बच्चा सिर्फ दो दिन का था। यदि छाती ओपेन सर्जरी की जाती तो शायद यह फैसला उसकी जिंदगी पर भारी पड़ सकता था। ऐसे में रोबोटिक सर्जरी करने का निर्णय लिया गया।
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- फोटो : social media
हालांकि यह पहली बार था कि जब इतनी जटिल स्थिति में रोबोटिक सर्जरी का फैसला लिया गया। पीजीआई में रोबोटिक सर्जरी का इस्तेमाल पिछले डेढ़ दो सालों से ही किया जा रहा है। इसका पहला इस्तेमाल यूरोलॉजी डिपार्टमेंट ने किया था। अब पीडियाट्रिक सर्जरी में भी इसका इस्तेमाल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी किया जाने लगा है, लेकिन इस मामले में सर्जरी को इस्तेमाल करना काफी चुनौतीपूर्ण था और हमने इसमें कामयाबी भी पाई।
बता दें कि पीजीआई में रोबोटिक सर्जरी का खर्चा करीब 30 हजार रुपये है, लेकिन बच्चे के परिजन गरीब हैं। डिलीवरी में भी काफी पैसा खर्च हो गया था। ऐसे में पीजीआई ने बच्चे की रोबोटिक सर्जरी बहुत कम खर्चे में की है। टीम का नेतृत्व पीडियाट्रिक विभाग के डॉ. रवि कनौजिया और एनेस्थिटिस्ट प्रो. नीरजा भारद्वाज ने किया। साथ में डॉ. अनुदीप, डॉ. स्वप्निल, डॉ. मोनिका व पीडियाट्रिक सर्जरी के हेड प्रो. राम समुझ का भी योगदान रहा।