तेज पानी के बहाव की वजह से नहर में दरार आ गई। 50 फीट दरार से पानी निकला, तो घर के घर डूब गए। अब हालात देख लें
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बठिंडा शहर की गणपति कॉलोनी के पीछे से गुजरते रजवाहे में 50 फीट दरार पड़ने से साईं नगर के करीब 200 घरों में दो से तीन फुट तक पानी भर गया। साथ ही किसानों की कई एकड़ बीजी कपास की फसल बर्बाद हो गई।
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दरार पड़ने के कई घंटों के बाद शुक्रवार सुबह तहसीलदार सुखबीर सिंह मौके पर पहुंचे। उनके एनडीआरएफ की टीम भी पहुंची। उन्होंने किश्तियों के माध्यम से लोगों को घरों से बाहर निकाला। एसडीएम साक्षी साहनी भी किश्ती पर ही लोगों से मिलने गई।
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तहसीलदार ने दरार को भरने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को आदेश दिए, लेकिन तब तक रजवाहे के पास किसानों की जमीन में बोई कपास की फसल पानी भरने से तबाह हो चुकी थी। वीरवार देर रात पानी का बहाव तेज होने से रजवाहे के ऊपर से जाने वाली पूली के ढह जाने से करीब 50 फुट से अधिक दरार पड़ गई। इससे आसपास के खेतों में ज्यादा पानी भर गया।
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सूचना मिलने पर पहुंचे किसानों ने शुक्रवार सुबह तुरंत अपने स्तर पर दरार को भरने का प्रयास किया। उन्होंने जिला प्रशासन को भी सूचित किया। तहसीलदार सुखबीर सिंह ने मौके का जायजा लिया। उन्होंने तुरंत लेबर को बुलाकर दरार भरने का कार्य शुरू करवाया।
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कई घंटों की मशक्कत और रजवाहे में पीछे से पानी बंद करवाने के बाद उक्त रजवाहे की दरार को भरा गया। तहसीलदार का कहना था कि दरार पड़ने से किसानों की 5 एकड़ फसल तबाह हुई है। उसकी गिरदावरी कर मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा कोई अन्य नुुकसान नहीं हुआ।
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आसपास के किसानों का कहना था कि पहले भी एक बार इसी जगह पर दरार पड़ी थी, लेकिन तब प्रशासन ने खानापूर्ति करते हुए दरार को सही ढंग से नहीं भरा। इस वजह से फिर दरार पड़ने से उनको नुकसान झेलना पड़ा है। उधर डिप्टी कमिश्नर दीप्रवा लाकरा का पक्ष जानने के लिए उन्हें फोन किया गया, लेकिन उन्होंने नहीं उठाया।
केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल भी शुक्रवार शाम करीब 7.30 बजे घटनास्थल पर पहुंचीं। उन्होंने पीड़ित लोगों और किसानों से मुलाकात की। मंत्री ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को पीड़ित लोगों को जल्द मुआवजा दिलावने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों को फटकार भी लगाई।