पिता बरगद के उस वृद्ध की तरह होता है, जिसके नीचे उसका परिवार पलता बढ़ता है। #FathersDay के मौके पर पढ़िए एक बेमिसाल कहानी...
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डा. गजेंद्र दीवान के पिता
कहते हैं बच्चों के लिए पिता ही उनका रोल मॉडल होते हैं। पिता बच्चों को जीना सिखाते हैं। हालात का सामना करने का हौसला जगाते हैं। असमय पिता का साया सिर से छिन जाए तो परिवार पर जो संकट आता है, इसे वही समझ सकता है, जो इसे झेलता है। ऐसे में परिवार को संभालने के लिए मां पिता की जिम्मेदारी भी निभाती है। ऐसी ही कुछ माताओं से आज आपको रूबरू करा रहे हैं।
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अपनी माता के साथ डा. गजेंद्र दीवान
चंडीगढ़ के सेक्टर 22 में रहने वाली आशा देवी के पति श्रीराम सेना में अफसर थे। करीब 40 साल पहले उनकी आकस्मिक मौत हो गई। उनके जाते ही आशा देवी की दुनिया सूनी हो गई। पांच बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी।
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अपनी माता के साथ डा. गजेंद्र दीवान
आशा देवी बताती हैं कि उन्होंने निश्चय किया कि वे हालातों से लड़ेंगी। पति की अंतिम इच्छा थी कि उनके बच्चे पढ़ लिखकर कामयाब बनें। आशा ने अपनी सारी जमा पूंजी बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर दी। आखिर उनकी सालों की मेहनत सफल हुई और उनके पांचों बच्चे कैरियर के शिखर पर पहुंच गए।
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अपनी माता के साथ डा. गजेंद्र दीवान
बड़ी बेटी चंद्रा डोगरा जम्मू में डाक्टर हैं। दूसरी बेटी नीलम कलसी सुप्रीमकोर्ट में एडवोकेट, तीसरी बेटी सुमनजैन भी सुप्रीमकोर्ट में एडवोकेट, चौथे नंबर पर डा. गजेंद्र दीवान हैं, जो पंजाब स्वास्थ्य विभाग में डिप्टी डायरेक्टर हैं। सबसे छोटे बेटे डा. राजीव दीवान भी डाक्टर है। उनका कालका में प्राइवेट हास्पिटल है।
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अपनी माता के साथ डा. गजेंद्र दीवान
डा. गजेंद्र दीवान बताते हैं कि जब वह बारहवीं में थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। वे मानते हैं कि जीवन में पिता की कमी तो है, मगर मां ने कभी महसूस नहीं होने दी। दिन रात मेहनत करके उन्होंने सभी बेटों को पढ़ाया-लिखाया। उनकी उम्र 80 साल हो गई है, लेकिन उनका वही रुटीन है, जो 40 साल पहले था।
जिस तरह हम सभी बच्चों को वह सुबह उठाती थी, आज वे हमारे बच्चों को सुबह जगाती हैं। डा. दीवान और उनके छोटे भाई डा. राजीव दीवान के बेटे हॉस्टल में रहते हैं। आशा देवी रोज सुबह फोन कर दोनों बच्चों को उठाती हैं और उनसे बातचीत करती हैं। आशा देवी ने बताया कि उनके बच्चे कभी उनके सामने नहीं रोए। इससे उन्हें हालात का सामना करने की शक्ति मिली।