इस अभागन मां ने जब अपने तीन बच्चों के शव देखे तो वह बदहवास हो गई और फिर उसके मुंह से ऐसी बात निकली, सुनकर सभी का कलेजा फट गया।
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मोरनी हिल्स में मिले तीन बच्चों के शव
घटना हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले की है। पेहोवा के गांव सारसा निवासी सोनू ने चचेरे भाई जगदीप मलिक से अपने ही तीन मासूम बच्चों की हत्या करवा दी। हत्यारोपी जगदीप की निशानदेही पर कुरुक्षेत्र पुलिस ने तीनों बच्चों के शव पंचकूला में मोरनी के जंगलों से बरामद किए। बच्चों की पहचान समीर 11 वर्ष, सिमरन आठ वर्ष और समर चार वर्ष के रूप में हुई थी और तीनों की गोली मारकर हत्या की गई।
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तीन बच्चों का अंतिम संस्कार
अपने ही सुहाग द्वारा अपने ही बच्चों के साथ किए गए इस कांड ने मां सुमन का दिल छलनी कर दिया। उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे, बदहवासी की हालत में वह बस यही कहती कि अब मैं कैसे जिऊंगी। बुधवार को शव मिले और वीरवार को तीनों बच्चों का पोस्टमार्टम किया गया। रिपोर्ट में आया कि गोली लगने से तीनों की मौत हुई। दादा जीत राम तीनों के शव लेकर गांव पहुंचे तो कोहराम मच गया।
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तीन बच्चों का अंतिम संस्कार
अपने कलेजे के टुकड़ों के शव देखकर मां सुमन बेहोश हो गई। जैसे-तैसे उसे होश में लाया गया तो वह बार-बार वह चिल्लाती कि मारना ही था तो मुझे मार देते, मासूमों ने क्या बिगाड़ा था। मैं तो अपने बच्चों के सकुशल लौटने की राह देख रही थी। कह रहे थे कि मेला देखने गए हैं। मेरे बच्चों के साथ ये क्या हो गया, अब मैं कैसे जिऊंगी, किसके सहारे जिऊंगी। भगवान ने मेरे साथ न्याय नहीं किया।
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तीन बच्चों का अंतिम संस्कार
क्योंकि हालात सही नहीं थे, इसलिए गांव पहुंचते ही बच्चों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। दोनों भाई समीर और समर को एक अर्थी पर श्मशान भूमि तक ले जाया गया। जबकि उनके पीछे-पीछे बहन सिमरन का शव लेकर गांव वाले संस्कार के लिए पहुंचे। बच्चों के मामा ने शवों को मुखाग्नि दी। हर आंख में आंसू थे और हर जुबान पर ऐसा घिनौना काम करने वालों के लिए फांसी की मांग।
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तीन बच्चों का अंतिम संस्कार
दूसरी ओर, मामले में आरोपी सोनू के पिता जीतराम ने पंचकूला के सिविल अस्पताल में बिलखते हुए कहा कि यदि डेढ़ साल पहले सोनू की जान न बचाई होती तो आज तीनों पोते-पोती जीवित होते। हत्यारोपी सोनू के पिता जीतराम ने कहा कि हादसे में वह गंभीर घायल हो गया था। उसे बचाने की तमाम कोशिशें की थी। रोते हुए कहा कि अगर उस वक्त ही सोनू की मौत हो जाती तो यह दिन नहीं देखना पड़ता।
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तीन बच्चों का अंतिम संस्कार
दादा जीतराम ने सोनू का किसी अन्य महिला से प्रेम प्रसंग होने की बात कबूल करते हुए कहा कि ऐसा गांव में हो नहीं सकता था। इसके एवज में बच्चों की हत्या करना अमानवीय है। नम आंखों से दादा ने कहा कि अपने खून के प्यासे हत्यारों को बड़ा करने के लिए उन्होंने आंखों का ऑपरेशन करवाने के बाद रात के वक्त भी खेती करने में बिताया। लेकिन बड़े होकर ऐसे हत्यारे बने, भतीजे से यह उम्मीद नहीं थी।
पोती के कानों की बाली से बिलख पड़े दादा
आरोपी जगदीप अपनी ही स्विफ्ट कार से तीनों बच्चों को लेकर पंचकूला के मोरनी पहुंचा। रेकी के बाद बच्चों को ऐसी जगह पर लेकर पहुंचा, जहां वीरानी हो, फिर एक के बाद एक फिल्मी अंदाज में रविवार को तीनों को गोली मारकर हत्या कर दी थी। पोस्टमार्टम के बाद 8 वर्षीय सिमरन के कानों में सोने की बाली, जब उसके दादा को दिखाई गईं तो बिलख पड़े।