फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नोटबंदी के बाद कैसे हैं हालात, देखिए इन पंक्तियों में क्या कहते हैं कवि?

Sun, 01 Jan 2017 10:08 AM IST
शील भारद्वाज/अमर उजाला, बहादुरगढ़(हरियाणा)
विज्ञापन
1 of 8
नोटबंदी पर कवि मन भी होता है उद्वेलित
नोटबंदी के बाद पैदा हुए हालात पर अनेक कवियों ने अपने-अपने ढंग से कविताओं की रचना कर अपने मत की बात कही है। देखिए, ये कविताएं।
विज्ञापन

2 of 8
2000 Note
कवयित्री वीणा अग्रवाल ने नोटबंदी के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया है

धन्य हो तुम मोदी
तुमने चोरों की कब्र खोदी
देखो कैसे तिलमिला रहे हैं
सारे विरोधी हाथ मिला रहे हैं
विज्ञापन

3 of 8
2000 के नकली नोट के साथ खरीदारी
मंदिर, गुरुद्वारों में और पंडितों, ज्योतिषियों के दरबारों में भी प्रतिबंधित नोटों को चलाने और बदलवाने की चर्चाएं हैं। गीतकार कृष्ण गोपाल विद्यार्थी का कवि मन कहता है कि भगवान भी इसी काम में व्यस्त रहते हैं

हर कोई हैरान था, पंडित जी परेशान, 
आज सुबह गायब मिले मंदिर से भगवान।
मंदिर से भगवान को जब यूं गायब पाया,
बिना बताए कहां गए, कुछ समझ न आया।
प्रभु ने आकर यह गुत्थी खुद ही सुलझाई,
बोले- मैं तो नोट बदलने गया था भाई।

4 of 8
2000 rs note
नोटबंदी पर हरियाणवी शायरी

आगै कदम बढ़ाया सै तो पाछै कदम हटाईयो ना।
चोर-लुटेरे कट्ठे हो रे, उन सै डर मत जाइयो ना।।
कुछ नेता और उनके चमचे, कुछ दिन शोर मचावैंगे।
अडिग फैसले पै रहणा ये सब बिल म्हं घुस जावैंगे।
जनता तेरे साथ खड़ी सै, बिल्कुल भी घबराइयो ना।
विज्ञापन

5 of 8
दो हजार रुपये का नोट
गुरुग्राम के ही सुंदर कटारिया ने भी मोदी के नोटबंदी के कदम को सही ठहराया है। उन्होंने अपने मन की बात इस तरह कही

काले धन आल्यां की नैया तन्नै कती डुबो दी जी
आग्गै आणे वाली पीढ़ी याद करैंगी मोदी जी।
खाणा-पीणा सादा होग्या पिजा-बर्गर खावैं क्यूकर
बड़े नोट सब दाब्बे बैठे सौ का खुल्ला ल्यावै क्यूकर।
किसकै जाकै टक्कर मारै कोण बदलदे नोट बताओ
उड़गे सबके तोते-तीत्तर नींद चैन की पावै क्यूकर।
धोले पहरण आल्यां की भी अच्छी दही बिलोदी जी
आग्गै आणे वाली पीढ़ी याद करैगी मोदी जी।
विज्ञापन

6 of 8
दो हजार रुपये का नोट
बहादुरगढ़ के युवा कवि शिव पाराशर का कहना है कि नोटबंदी से देश में कई तरह के सुधार होंगे

ऐसा ही कुछ लग रहा नोटबंदी के बाद
उदय हो गया देश में मानो समतावाद
मानो समतावाद बड़ा ना कोई छोटा
ना लाइन में वीआईपी का कोई कोटा
नोटबंदी थी बनी देश की बड़ी जरूरत
अब बदलेगा भारत और बदलेगी सूरत।
विज्ञापन

7 of 8
2000 note
तीस हजारी निवासी कवि राजेंद्र चंचल को नोटबंदी के फैसले को सही ढंग से लागू न करने का मलाल है। उन्हें शिकायत है कि जरूरतमंद आम आदमी को पैसे नहीं मिल रहे और कालेधन वालों की अब भी मौज है

हम लोग सौ पचास के लिए भी तरस रहे हैं,
उधर छमाछम नोट पर नोट बरस रहे हैं।
विज्ञापन

8 of 8
हिसार के कवि डॉ. चंद्रशेखर ने हालात बयां किए

कैसे लिख दूं मैं अभी, सुनो पंक्तियां चार
नोट मिलें ना बैंक से, लंबी लगी कतार
लंबी लगी कतार, मगर जब नंबर आया
एटीएम के साथ, बैंक भी खाली पाया
कह शेखर कविराय, बैंक से काले पैसे
कोई बताओ जुगत, अभी मिलते हैं कैसे
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें