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देखिए, निदा फाजली की मुशायरा-ए-महफिल

Sun, 21 Sep 2014 02:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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निदा की फिलॉसफी से लबरेज संजीदा शायरी दर्शकों के हिस्से आई। कुछ मिसालों पर गौर फरमाइएः
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देखिए, निदा फाजली की मुशायरा-ए-महफिल

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दिलों को जीतूं, वो जादू सिखा गई मुझको, वो मेरी मां थी जो उर्दू सिखा गई मुझको...
मैं उर्दू का हूं शैदाई ग़ज़ल की शान वाला हूं, मोहब्बत नाम है मेरा, मैं हिंदुस्तान वाला हूं।
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फरीदाबाद से तशरीफ लाए यूसुफ भारद्वाज ने ग़ज़ब के फक्कड़ अंदाज में टैगौर थिएटर को ठहाकों से सराबोर करा दिया।

देखिए, निदा फाजली की मुशायरा-ए-महफिल

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यूसुफ भारद्वाज ने हरियाणा वालों की मस्ती और सादगी की शान में दर्जनों लतीफों की गुगली फेंकी जिन्हें बल्ले पर लेते-लेते दर्शकों के पेट में बल पड़ गए।
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कलीम कैसर, टौंक से डा. जया टौंकी, भोपाल से विजय तिवारी, पुणे से असलम चिश्ती, मुरादाबाद से कशिश वारसी समेत करीब बीस शायरों ने शाम को यादगार बना दिया।
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