झकाझक सफेद कुर्ता। काले रंग के जूते और आंखों में ऐनक। चेहरे पर मुस्कान.....एकदम बिंदास....। यह हैं गीतकार गुलजार.....। पंजाब यूनिवर्सिटी में उनको साहित्य के लिए बुलाया गया और अपने घर में सम्मान सबसे ज्यादा बेहतर लगा। गोल्डन जुबली हाल में गुलजार को सुनने के लिए स्टूडेंट्स की जबरदस्त भीड़ रही।
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देखिए, माइक हाथ में आते ही 'गुलजार' हुई महफिल
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गुलजार से किसी ने पूछा कि अब उनके गीतों का ट्रेंड बदल गया तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है। वह जो गीत फिल्मों के लिए लिखते हैं वह भी गंभीरता का आवरण होते हैं। मसलन बीड़ी जलइले सुनिए तो उसमें भी गहराई है। पंजाब विवि के वीसी अरुण ग्रोवर और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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गुलजार से एक स्टूडेंट ने सवाल किया कि कौन सी रचना है जिससे वह उबर नहीं पाए तो गुलजार ने कहा कि मेरे साथ बैठी हुई नज्म...मेरे साथ रोज जाम पीती है....मैं तो एक जाम पीता हूं वो सुराही से लगी रहती है, मुझको चढ़ जाती है पर उसको चढ़ती भी नहीं।
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गोल्डन जुबली हाल में गुलजार को सुनने के लिए स्टूडेंट्स की जबरदस्त भीड़ रही। पंजाब विवि के वीसी अरुण ग्रोवर और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। एक स्टूडेंट की डिमांड पर सुनाया...मैं सिगरेट तो नहीं पीता....आने जाने वालो से पूछता रहता हूं...आपको पास माचिस तो नहीं...बहुत कुछ है जो मैं फूंक देना चाहता हूं।
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गुलजार ने कहा कि बात कहीं से भी चले फिल्मों पर ही खत्म होती है। उनको साहित्य में मुकाम हासिल तो अब हुआ जबकि उनको यहां सम्मान के लिए बुलाया गया। फिल्में उन्होंने बनाना इसलिए बंद कर दिया क्योंकि एक ठहराव जैसा आ गया था।
पद्मविभूषण गुलजार ने पहले अपनी किताब गुलजार प्लूटो के अंग्रेजी अनुवाद का विमोचन किया। इस किताब को अंग्रेजी में निरुपमा दत्त ने अनुवाद किया है। उन्होंने कहा कि अच्छा तब लगता है कि जब कोई साहित्य की बात करता है। पंजाब यूनिवर्सिटी में उनको साहित्य के लिए बुलाया गया और अपने घर में सम्मान उनको सबसे ज्यादा बेहतर लगा।