अगर इंसान आज नहीं संभला तो आने वाली पीढ़ी का बचपन छीन जाएगा। बहुत गहरा मतलब है इसका। जानने के लिए देखिए आगे की स्लाइड्स।
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आज नहीं संभले तो छीन जाएगा कल...क्या मतलब है इसका?
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10-12 बच्चों के ग्रुप ने खेल-खेल में अपने बड़ों को ऐसी बात सिखा दी कि वे बस देखते रह गए। बच्चों ने बताया कि अगर वह आज नहीं संभले तो आने वाले वक्त में बच्चों का बचपन उनसे छीन जाएगा। उनके खेलने के लिए जगह नहीं होगी और वह केवल मशीन बनकर रह जाएंगे।
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दरअसल, चंडीगढ़ के टैगोर थियेटर में नाटकों का दौर चल रहा है। इनमें छोटे-छोटे बच्चे भी बड़े-बड़े किरदार निभाते हैं। ऐसे ही दो नाटकों कैसे आया बसंत और स्वच्छ मन, स्वच्छ भारत का मंचन किया गया।
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कैसे आया बसंत नाटक की शुरुआत एक ऐसे गार्डन से होती है जो काफी हराभरा है और उसमें कई फलों के पेड़ हैं। यहां बच्चे रोजाना खेलने आते हैं। लेकिन इस बगीचे का मालिक एक दिन बच्चों को डरा धमकाकर वहां से भगा देता है और बगीचे के चारों ओर ऊंची दीवार खड़ी कर देता है। इसके बाद बच्चों के खेलने कूदने की जगह छिन जाती है। वह मायूस हो जाते हैं।
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अरसा बीत जाता है लेकिन बगीचे के मालिक को बसंत के आने का पता नहीं चलता। उसका बगीचा सूखने लगता है। वह खुद इससे परेशान हो जाता है और उदास रहने लगता है। एक दिन बच्चे बगीचे की दीवार में से रास्ता देखते हैं। इसके बाद वह फिर से बगीचे में खेलने पहुंच जाते हैं। बच्चों की चहचहाहट और खेलने की आवाज मालिक सुनता है। इसके बाद उसे अहसास होता है कि बिना बच्चों और उनकी हंसी के इस बगीचे का कोई अस्तित्व नहीं है।
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स्वच्छ मन, स्वच्छ भारत’ नाटक एक सोसाइटी से जुड़ा है। इसमें ऊंचे तबके के लोग रहते हैं। वे लोग अपने घर का कचरा सोसाइटी के बाहर जमा करते हैं। इसे देखकर वहां रहने वाला एक व्यक्ति बहुत दुखी होता है। वह इस संबंध में शिकायत लेकर पुलिस के पास जाता है। लेकिन उसे वहां से नगर निगम भेज दिया जाता है। लेकिन वहां भी शिकायत की सुनवाई नहीं होती।
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इसके बाद वह सोसाइटी के लोगों को खुद सबक सिखाने की सोचता है। वहां जहां गंदगी जमा है वहां पहुंचता है और जोर-जोर से चिल्लाता है कि इस कचरे में ये चांदी का चम्मच किसका है। यह सुनते ही सभी लोग बाहर आते हैं और उसे अपना बताते हैं। सबके आपस में लड़ने पर वह उन्हें हकीकत बताता है और गंदगी फैलाने से रोकने के लिए प्रेरित करता है। वह कहता है कि हम लोगों के अगर मन ही साफ न हो तो हम देश में सफाई अभियान कैसे चलाएंगे।
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नाटक इतने जबरदस्त थे कि दर्शकों ने बच्चों को स्टैंडिंग ओवेशन दिया। इन नाटकों का आयोजन राइट पाथ और एज थिएटर की ओर से किया गया था।
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कैसे आया बसंत का निर्देशन राजेश अमरलाल बब्बर ने किया। स्वच्छ मन, स्वच्छ भारत का निर्देशन जुल्फिकार ने किया। इससे पहले बच्चों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री ‘चेयर क्लब’ दिखाई गई। इसमें 25 बच्चों की सफलता की कहानियों को दिखाया गया।
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कार्यक्रम की शुरुआत में रॉक गार्डन के क्रिएटर पद्मश्री नेक चंद सैनी को श्रद्धांजलि दी गई। आर्ट कॉलेज के स्टूडेंट रमन ने थिएटर एज की नेक चंद से जुड़ी यादों को एक स्लाइड शो के जरिये दिखाई। इसके बाद 2 मिनट का मौन धारण किया गया।