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किसी चीज को लेकर सोच स्वभाव ऐसा हो गया है तो सावधान, खतरनाक है

Sun, 17 Sep 2017 12:26 AM IST
सीमा एस आनंद/अमर उजाला, चंडीगढ़
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मेडिटेशन
अगर किसी चीज या बात को लेकर आपका स्वभाव ऐसा हो गया है या सोच ऐसी हो गई है तो सावधान, खतरनाक साबित हो सकती है। ऐसा ही कुछ हुआ इनके साथ...
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एक कहावत है कि चीजों को इस्तेमाल करें और लोगों से प्यार करें। जबकि हम लोगों को इस्तेमाल करते हैं और चीजों को प्यार करते हैं। चीजों के प्रति इसी प्यार ने ही गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी को एक छह वर्षीय मासूम का कातिल बना दिया। मामला है अमृतसर के जंडियाला के गांव मलिकपुर का। ट्रैक्टर के पास खेलते हुए शुभप्रीत सिंह उस पर स्क्रैच न डाल दें, इस शक में गोपी ने उसको मौत के घाट उतार दिया। इससे दो दिन पहले भी वह एक बच्चे को इसलिए थप्पड़ जड़ चुका था कि वह उसके ट्रैक्टर पर बैठा था।
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उसकी चीज पर आंख भी उठाई तो हो जाता है उग्र
गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी ने जैसे ही शुभप्रीत को अपने ट्रैक्टर पर बैठा देखा उसने उसे पकड़ा और उसे गुस्से से घर के अंदर ले गया। गोपी ने यह कबूला है कि उसने शुभप्रीत की गला घोंटकर इसलिए हत्या कर दी कि कहीं वह उसके ट्रैक्टर पर स्क्रैच न डाल दे। गुरप्रीत सिंह इतना साइको है कि उसकी किसी चीज की ओर कोई आंख उठाकर नहीं देख सकता। इससे वह उग्र हो जाता है। यही शुभप्रीत की मौत का कारण बन गया।
- परमपाल सिंह, एसएसपी अमृतसर

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स्ट्रेस
ऐसे केसों को साइकी केस कहते हैं
नेशनल एसोसिएशन ऑफ साइकोलॉजी साइंस के प्रेसीडेंट प्रो. रोशन लाल के अनुसार ऐसे लोगों को साइकी कहा जाता है। इन पर यदि अहंकार हावी हो जाता है तो वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। गलत काम कर देने के बाद ऐसे लोग रोते-चिल्लाते हैं। स्कूल, कॉलेज में भी बच्चों की काउंसलिंग होनी चाहिए। अब तो सीबीएसई ने भी प्लस टू लेवल पर हर स्कूल, कालेज में साइकोलॉजी का काउंसलर अनिवार्य किया है।
- प्रो. रोशन लाल, पीयू मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर
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ओवरवर्क
बचपन से ही बच्चों को समझाना होगा
अपनी चीजों के प्रति जरूरत से ज्यादा संवेदनशील होने के पीछे कई कारण होते हैं। यदि अभिभावक अपने-अपने कामों में व्यस्त हैं और बच्चों को समय नहीं दे पाते तो वह मैरियलेस्टिक हो जाता है। टीनेएज में माता-पिता को चाहिए कि वे अपने युवा होते बच्चों की हर हरकत पर नजर रखें। दोस्ताना व्यवहार करें, ताकि वे अपने रास्ते से भटक न जाएं। यदि बच्चे के व्यवहार में बदलाव आता है तो प्यार से उसे बैठाकर समस्या पूछें और उसका समाधान करने की कोशिश करें।
- डॉ. हेमा शर्मा, साइकोलॉजिस्ट, कुल्लू
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चीजों को आपस शेयर करना सिखाएं
अपनी चीजों पर अधिकार जताना भी एक बीमारी है। इसके लिए परिवार को चाहिए कि बचपन से ही बच्चों में मिल बांटकर चीजों को इस्तेमाल करने की आदत डालें। यदि इसके बावजूद बच्चा चीजों से अत्यधिक लगाव रखता है तो उसे साइक्रेटिस्ट को दिखाएं।
- रेणू फूलिया, पूर्व डायरेक्टर, महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय
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