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ई-वे बिल के दो बड़े फायदे, कारोबारियों के लिए तोहफा, अफसरों के लिए टेंशन

Mon, 26 Feb 2018 02:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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ई वे बिल
ई-वे बिल सिस्टम लागू हो गया है, जानिए इसके दो बड़े फायदे। यह प्रणाली जहां कारोबारियों के लिए तोहफा है, वहां अफसरों के लिए बड़ी टेंशन है।
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ई वे बिल - फोटो : SOCIAL MEDIA
जीएसटी के तहत ई-वे बिल सिस्टम एक फरवरी 2018 से लागू हो गया। अब देश भर में सामान ले जाने वाले वाहन वैध होंगे। जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) की तरफ से जारी एक बयान में बताया गया कि हर राज्य में 10 किलोमीटर अंदर प्रवेश करने वाले वाहन जिसमें 50,000 रुपये या उससे अधिक के मूल्य के सामान हैं, उसके लिए अब ई-वे बिल अनिवार्य होगा।
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ई वे बिल - फोटो : SOCIAL MEDIA
ई-वे बिल सिस्टम के तहत अब करदाताओं और ट्रांसपोर्टरों को किसी भी टैक्स कार्यालय या चेक पोस्ट पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि ई-वे बिल इलेक्ट्रॉनिक रूप से तैयार किया जा सकता है और इसमें खुद से पैसे कट जाएंगे। बड़े उपयोगकर्ता इस ई-वे बिल की नई प्रणाली को पोर्टल पर मोबाइल ऐप, एसएमएस और ऑफलाइन टूल के जरिए उपयोग कर सकते हैं।

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ई वे बिल
ई-वे बिल के तहत अब माल सप्लाई के दौरान रास्ते में बिना वजह का शोषण खत्म हो जाएगा। क्योंकि अब कंसाइनमेंट को बिना वजह यदि किसी भी टैक्स आफिसर या इंस्पेक्टर ने रोका या किसी प्रकार की नाजायज मांग की तो उन्हें कंसाइनमेंट की यह ‘नजरबंदी’ महंगी पड़ जाएगी। केंद्रीय शुल्क (ऑडिट) आयुक्त के क्षेत्रीय कार्यालय ने इस सिस्टम से हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ सरकारों को अवगत करवा दिया है।
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ई वे बिल

विभाग के एक आला अफसर ने बताया कि इससे अभी स्थिति यह थी कि कारोबारी अपने माले की कंसाइनमेंट राज्य के भीतर या राज्य से बाहर भेजता है, तो कई बार केंद्रीय व राज्य सरकारों के अधीनस्थ सेल्स टेक्स, एक्साइज टैक्स इत्यादि विभाग के अफसर व निरीक्षक रोक लेते थे। कई-कई घंटों माल से लदे ये वाहन राज व राष्ट्रीय मार्गों के किनारे सड़कों पर बिना वजह अफसर व निरीक्षक की नजरबंदी में रहते थे।
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ई वे बिल
अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि अब अगर अफसर ने माल लदे वाहन को आधे घंटे से ज्यादा रोका तो उसे जवाब देना होगा। अफसर को ऑनलाइन डिटेनशन आर्डर देकर बताना होगा कि उसने संबंधी कंसाइनमेंट (माल से लदा वाहन) क्यों रोका, उसके बाद उसने क्या दस्तावेज चेक किए, कब तक अपनी तफ्तीश जारी रखी, उस तफ्तीश का नतीजा क्या निकला, कोई अनियमितता सामने आई तो क्या उसने क्या कार्रवाई की? इस सिस्टम से कंसाइनमेंट की सारी मूवमेंट जीएसटीएन पोर्टल की निगरानी में रहेगी।
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ई वे बिल
इसके अलावा यदि सप्लायर ने बिना वजह हरासमेंट के इरादे से कंसाइनमेंट रोकने की शिकायत कर दी, तो संबंधित अथारिटी के समक्ष पेश होकर अफसर व निरीक्षक को अपना जवाब देना होगा। जीएसटी के अंतर्गत रजिस्टर्ड कोई भी उद्यमी व कारोबारी 50 हजार लागत से अधिक माल को कोई सप्लाई करता है, तो वे जीएसटीएन (पोर्टल) पर जाकर अपना इलेक्ट्रानिक बिल जनरेट करेगा।
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ई वे बिल
इसके बाद पोर्टल सप्लायर को एक ईबीएन (ई-वे बिल नंबर) जनरेट किया जाएगा, जिसे सप्लायर, माल प्राप्त करने वाले और ट्रांसपोर्टर से भी शेयर करेगा। जीएसटी के अंतर्गत कंसाइनमेंट के लिए 100 किमी की दूरी तक  ई-वे बिलकी वैधता एक दिन, 300 किमी दूरी के लिए तीन दिन, 500 किमी के लिए पांच दिन, 1000 किमी के लिए दस दिन और 1000 किमी से अधिक के लिए 15 तक रहेगी। यानी इन दिनों के भीतर संबंधित माल गंतव्य तक हर हाल में पहुंचना होगा।
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