आम खाने का शौक रखते हैं और आते जाते सड़क किनारे बिकने वाले आम खरीदकर घर ले जाते हैं तो संभल जाएं। आप बहुत बड़े खतरे में हैं, देखिए...
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Mango
बात ये हैं कि पपीते के बाद आम को भी कैल्शियम कार्बाइड से पकाने का मामला सामने आया है। फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने चंडीगढ़ में छापा मारकर कई किलो आम पकड़ा है। ये आम कैल्शियम कार्बाइड से पकाए जा रहे थे।
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mango eating
बता दें कि फलों के पकाने के लिए केमिकल के इस्तेमाल पर रोक है। इसके बावजूद आम को कैमिकल से पकाया जाता है। फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट की हिदायत को दरकिनार करके मंडी में चोरी-छिपे यह काम अंजाम दिया जा रहा है।
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mango eating
पिछले एक महीने में फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट कई छापामारी कर चुकी है। सबसे पहली रेड में ढाई टन पपीता, उसके बाद पांच टन पपीता, फिर 200 किलो और फिर 180 किलो आम पकड़ा गया। अभी भी छापामारी जानी है और कई किलो आम पकड़ा जा चुका है।
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आम का सीजन
- फोटो : amar ujala
विशेषज्ञों का कहना है कि जहां से फलों की सप्लाई होती है, वहां पर केमिकल या इथिलिन नहीं डाला जाता। चंडीगढ़ में फल पकाने का काम होता है। लोगों को यदि स्वच्छ फल खरीदने हैं तो सुबह छह बजे के आसपास मंडी पहुंचें और फल खरीदें। उस दौरान जो भी फल मिलेंगे वे ताजे और स्वच्छ होंगे।
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कैल्शियम कार्बाइड से नुकसान
पीजीआई से जुड़े डाक्टरों ने बताया कि केमिकल युक्त फल खाने से न्यूरो से संबंधित बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। डायरिया और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है।
कैसे पहचानें केमिकल का इस्तेमाल
यदि फल पूरे एक रंग से पक रहा है तो समझ जाइए कि केमिकल का इस्तेमाल किया गया है। बिना केमिकल से फल पर कई रंग होते हैं जैसे कि आम कहीं से पीला होगा या फिर हरा। फल में जगह-जगह सफेद रंग के धब्बे जैसे होंगे। इससे आसानी से फल को पहचाना जा सकता है।