क्लीनिकल डेड घोषित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज के अंतिम संस्कार पर रोक जारी है। अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी। देखिए, पूरा मामला।
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एक महाराज, दो साल से क्लीनिकल डेड पर संस्कार पर रोक
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28 जनवरी 2014 को दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष जी महाराज समाधिलीन हो गए थे। चिकित्सकों ने 29 जनवरी 2014 को उन्हें क्लीनिकल डेड घोषित कर दिया था, लेकिन उनके अनुयायी नहीं माने।
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खबर फैलते ही हजारों अनुयायी नूरमहल में इकट्ठा हो गए थे और आशुतोष महाराज के समाधि से बाहर निकलने की दुआएं मांगने लगे। आज तक कोर्ट में यह मामला चल रहा है और अभी तक आशुतोष महाराज की समाधि पर सस्पेंस बरकरार है।
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खुद को महाराज आशुतोष का बेटा होने का दावा करने वाले दलीप झा की तरफ से केस दायर किया गया था। इसमें दलीप झा का कहना था कि आशुतोष महाराज उसके पिता हैं और बेटा होने के नाते उसको पिता के अंतिम संस्कार करने की आज्ञा दी जाए।
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हालांकि संस्थान के संचालकों का कहना है कि महाराज आशुतोष गहन समाधि में हैं। यह समाधि कितनी लंबी चलेगी, इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता। बहरहाल आशुतोष महाराज को फ्रीजर वाले रूम में रखा गया है।
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खुद को कभी आशुतोष महाराज का ड्राइवर बताने वाले पूर्ण सिंह देसल का आरोप है कि 28 जनवरी से आश्रम प्रबंधक महाराज को समाधि में बता रहे हैं। गद्दी और 1 हजार करोड़ की जायदाद की वजह से उनके शरीर की बेअदबी कर रहे हैं। आश्रम के प्रबंधक उनकी देह को जिला प्रशासन के अफसरों को दिखाएं। हमने हाईकोर्ट में यही बिंदु रखे हैं। कपूरथला के देसल गांव के पूर्ण सिंह 1988 से नूरमहल के मोहल्ला ओहरियां में रहते हैं।
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हाईकोर्ट के तर्कः कोर्ट ने कहा था कि पंजाब सरकार, महाराज के बेटे होने का दावा करने वाले दलीप झा और संस्थान तीनों ही यह मानते हैं कि महाराज क्लीनिकली डेड हैं। यदि ऐसा है तो फिर संस्थान इस मामले में पहल करे और विचार करे कि महाराज का संस्कार किस तरह से किया जाए। कोर्ट को नहीं लगता कि बेटे का दावा करने वाले या सरकार को इस पर आपत्ति होगी। 24 फरवरी को मामले पर सुनवाई होगी।