घर से बाहर निकले हैं, ट्रैफिक चालान से बचना है और बिना किसी टेंशन के ड्राइविंग करना चाहते हैं तो ये तरीका अपना लेना, न लाइसेंस चाहिए होगा और न ही आरसी।
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दरअसल, सरकार ने किसी भी काम के लिए लाइसेंस या अन्य दस्तावेजों की हार्डकॉपी साथ रखने या साथ ले जाने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। अब आपको एक डिजिलॉकर खोलना होगा। इसमें आप अपने सभी दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी रख सकते हैं। डिजिलॉकर से दो फायदे होंगे, एक तो दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे। दूसरा ये कि कहीं भी जरूरत पड़े, लॉकर खोलकर यूज कर सकेंगे।
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ऐसे करें इस्तेमाल
डिजिलॉकर बनाने के लिए आपको digilocker.gov.in पर अपना अकाउंट बनाना होगा। इसके लिए आपको अपने आधार कार्ड नंबर की जरूरत होगी ताकि फर्जीवाड़े से बचा जा सके। साइट पर साइनअप करने के लिए आधार नंबर मांगा जाएगा। इस पर क्लिक करते ही आपको आधार कार्ड में दिए गए मोबाइल नंबर पर पासवर्ड आ जाएगा।
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साल 2015 में हुई थी शुरुआत
डिजिलॉकर प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना डिजिटल इंडिया का एक अहम हिस्सा है। फरवरी 2015 में इसे शुरू किया गया था। डिजिलॉकर में वोटर कार्ड, पासपोर्ट, पैनकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मान्यता प्राप्त स्कूल कॉलेज के पहचान पत्र, बैंक की पासबुक, क्रेडिट कार्ड, आधार कार्ड के साथ फोटो पहचान प्रमाण सुरक्षित रख सकते हैं। पुलिस चेकिंग के दौरान जरूरी दस्तावेजों को दिखाकर चालान से बचा सकता है। अगर ट्रैफिक नियम तोड़ा है या फिर कोई दस्तावेज नहीं है तो चालान के लिए हार्ड कापी मांगी जाएगी।
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डिजिलॉकर में क्या-क्या रखें?
- ड्राइविंग लाइसेंस
- रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट
- इंश्योरेंस
- पॉल्यूशन सर्टिफिकेट
- वोटर आई कार्ड
- आधार कार्ड
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डिजिलॉकर कैसे खोलें?
-ऐप को digilocker.gov.in से डाउनलोड करें
- प्लेस्टोर से भी डाउनलोड कर सकते हैं
- सबसे पहले साइन अप करें
- आधार और मोबाइल फोन के जरिए रजिस्टर करें
- वनटाइम पासवर्ड से पहली बार डिजिलॉकर में जाएं
- इसके बाद अपना खुद का पासवर्ड बनाएं
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चंडीगढ़ में डीएसपी ट्रैफिक चरणजीत सिंह ने बताया कि चंडीगढ़ की साक्षरता दर अन्य शहरों के मुकाबले काफी ज्यादा है, बावजूद इसके शहर में डिजिलॉकर के प्रति जागरूकता की भारी कमी है। इसके पीछे बड़ा कारण प्रशासन और पुलिस की लापरवाही कही जा रही है। चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस ने अप्रैल 2019 में डिजिलॉकर में दस्तावेजों को आधिकारिक रूप में स्वीकार कर लिया, लेकिन इसकी जानकारी शहरवासियों को दी ही नहीं गई और न ही किसी तरह का जागरूकता कैंप लगाया गया। पुलिस के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि नाके के दौरान 100 में से चार-पांच लोग ही डिजिलॉकर में सुरक्षित दस्तावेज दिखा पाते हैं। ज्यादा लोगों को इसकी जानकारी नहीं है।
डीएसपी सिंह ने बताया कि शहर में जल्द ही ई-चालान की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए करीब 20 ई डिवाइस आने की संभावना है। जरूरत पड़ने पर डिवाइस की संख्या बढ़ाई जा सकती है। ड्रंकन ड्राइव समेत अन्य वॉयलेशन का भुगतान ई-डिवाइस से न होकर अदालत में ही करना होगा। ई-चालान की शुरुआत होने पर ट्रैफिक पुलिस और आरएलए, आरटीओ ऑफिस का सॉफ्टवेयर कनेक्ट होगा। इससे ट्रैफिक पुलिस के पास वाहन से जुड़ी सारी जानकारी आ जाएगी। बार-बार ट्रैफिक वॉयलेशन करने वाले वाहन चालकों का ड्राइविंग लाइसेंस भी सस्पेंड किया जा सकेगा।