कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय स्थित धरोहर हरियाणा संग्रहालय में अब 19वीं सदी में बना पुराना पालकी रथ भी शामिल हो गया है। देखिए, धरोहर की अन्य तस्वीरें।
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धर्मनगरी की 'धरोहर' की 7 ऐसी तस्वीरें, जो हैरान कर देंगी
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पालकी रथ का निर्माण लाडवा के लाला भगत राम गर्ग द्वारा सन 1880 में बनवाया गया था। 19वीं सदी का यह पालकी रथ लाडवा के पूर्व पार्षद आकाश गर्ग ने धरोहर हरियाणा संग्रहालय में अपने पिता लाला जंग बहादुर गर्ग के नाम से भेंट किया है।
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केयू प्रवक्ता डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि आकाश गर्ग द्वारा भेंट किया गया यह पालकी रथ 130 वर्ष से भी अधिक पुराना है। इसके चार पहिए हैं। शीशम से बना यह पालकी रथ सन् 1880 में मेरठ से बनाया गया था।
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इस रथ का प्रयोग पुराना सर्राफा बाजार लाडवा में स्थित रूलिया वाला मंदिर में वामन द्वादशी के मेले पर किया जाता था। गर्ग ने बताया कि इस मेले के दौरान इस रथ में भगवान वामन की मूर्तियां रखकर पूरे लाडवा में शोभायात्रा निकाली जाती थी। उस समय लोग इसे हाथों से खींचते थे।
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इस रथ के पीछे लाडवा के सभी मंदिरों की पालकियां होती थीं। यह शोभायात्रा राम कुंडी पर समाप्त होती थी। यहां आज भी वामन भगवान का मेला लगता है। धरोहर संग्रहालय के प्रभारी डॉ. महासिंह पूनिया ने बताया की धरोहर में इस तरह का पालकी रथ नहीं था।
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संग्रहालय में हरियाणवी परिवहन के 18 अन्य साधन है, जो पूरे उत्तर भारत में सबसे अधिक हैं। उत्तर भारत के किसी भी संग्रहालय में इतने पारंपरिक परिवहन के साधन नहीं है। यह रथ जर्जर अवस्था में है। इसको शीघ्र ही पारंपरिक तरीके से तैयार कर धरोहर के परिवहन के साधनों के बेड़े में शामिल किया जाएगा।
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संग्रहालय के प्रभारी डॉ. पूनिया ने केयू कुलपति डॉ. डीडीएस संधू की ओर से आकाश गर्ग को धरोहर और विश्वविद्यालय की ओर से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। गर्ग परिवार पहले भी धरोहर हरियाणा संग्रहालय में सन 1851 का बना हुआ अग्रवाल धर्मशाला का दरवाजा भेंट कर चुका है।