साध्वी रेप केस में 20 साल के लिए जेल में कैद राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा की तलाशी में प्लास्टिक करेंसी मिली है, जिसका असली सच खुद डेरा बता रहा है।
विज्ञापन
2 of 5
Dera's Plastic Currency
डेरे की प्रवक्ता ने बताया कि देश भर में सरकारी, अर्धसरकारी, प्राइवेट कैंटीन, छोटे बड़े रेस्टोरेंट हैं, जिनमें खाने पीने के सामान आदि के लिए टोकन की व्यवस्था होती है, ताकि ग्राहकों को असुविधा न हो। समय की बचत भी हो, बार बार के लेन देने और खुले पैसे की समस्या से निजात मिल जाती है। अलग अलग जगहों पर अलग अलग टोकन प्रयोग किए जाते हैं, जो कागज गत्ते या प्लास्टिक के होते हैं।
विज्ञापन
3 of 5
डेरा सच्चा सौदा में मिली प्लास्टिक करेंसी मिली
यही व्यवस्था डेरा सच्चा सौदा में की गई है। जब डेरे में सत्संग होता है तो लाखों की संख्या में डेरा प्रेमी जुटते हैं। इन्हें खाने पीने के स्टाल पर लेन देन करने में दिक्कत न हो, इसलिए टोकन उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसा नहीं है कि कोई इसके बारे में नहीं जानता। लेकिन कुछ चीज को कुछ दिखाकर पेश करना गलत है और यही किया जा रहा है। डेरे की टोकन व्यवस्था को लेकर जो कुछ दिखाया जा रहा है, वह बेबुनियाद है।
4 of 5
Dera's Plastic Currency
गौरतलब है कि सर्च ऑपरेशन के दौरान डेरा के अंदर एक कमरे से लाखों प्लास्टिक के टोकन मिले। ये डेरा सच्चा सौदा की अपनी प्राइवेट करंसी है। डेरा हर प्रकार का लेन-देन इस करंसी से होता था। डेरा की ओर से इसके लिए एक रुपये से लेकर हजार रुपये तक के टोकन बनाए गए थे। जो भी शख्स डेरा में आता उसे भारतीय करंसी को काउंटर में जमा करवाना होता, इसके बाद उसे डेरा करंसी के टोकन दिए जाते।
चाहे खरीदारी करनी हो, होटल में खाना खाना हो या फिर माही सिनेमा में फिल्म देखनी हो टोकन करंसी का ही इस्तेमाल होता था। सूत्रों के अनुसार सर्च ऑपरेशन के दौरान डेरा में मिले टोकनों की कीमत भारतीय करंसी में करीब 15 लाख रुपये है। हरियाणा पुलिस अब करेंसी से जुड़े तमाम पहलुओं की बारीकी से छानबीन कर रही है और माना जा रहा है कि इसके बाद आर्थिक अपराधों से संबंधित धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया जा सकता है।