करोड़ों लोगों के 'पिता जी' बाबा गुरमीत राम रहीम आखिर कौन हैं और ये डेरा सच्चा सौदा से कैसे, कब जुड़े? जानिए इनके और इनके परिवार के बारे में सब कुछ।
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गुरमीत राम रहीम का परिवार
गुरमीत राम रहीम सिंह अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। इनका जन्म 15 अगस्त, 1967 को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गुरूसर मोदिया में जाट सिख परिवार में हुआ था। इन्हें महज सात साल की उम्र में ही 31 मार्च, 1974 को तत्कालीन डेरा प्रमुख शाह सतनाम सिंह जी ने ये नाम दिया था।
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गुरमीत राम रहीम का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
23 सितंबर, 1990 को शाह सतनाम सिंह ने देशभर से अनुयायियों का सत्संग बुलाया और गुरमीत राम रहीम सिंह को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। डेरा प्रमुख के परिवार में उनकी माता नसीब कौर, पत्नी हरप्रीत कौर, बेटी चरणप्रीत कौर, अमनप्रीत कौर और हनीप्रीत कौर, बेटा जसमीत सिंह हैं। डेरा प्रमुख की पत्नी हरमीत कौर अक्सर घर में रहती है। वह डेरा में होने वाले सत्संगों में कभी-कभी ही नजर आती है।
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गुरमीत राम रहीम का परिवार
उन्होंने इन दो बेटियों के अलावा एक बेटी को गोद लिया हुआ है। डेरा प्रमुख का बेटा जसमीत सिंह है। उसकी शादी बठिंडा के पूर्व विधायक हरमिंदर सिंह जस्सी की बेटी हुस्नमीत से हुई। जसमीत शाह सतनाम क्रिकेट अकादमी का अध्यक्ष हैं और खेल गांव की कमान संभालता है। दो दोहते और एक पोता साहिबेदिल और पोती परणमीत हैं। इसके अलावा एक दोहती स्वीटलक है।
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गुरमीत राम रहीम का परिवार
बड़ी चरणप्रीत कौर की शादी डॉ. शान-ए-मीत के साथ हुई, जो डेरा के अस्पतालों के मुखिया हैं और अन्य गतिविधियों में भी बराबर की दखल रखता है। अमनप्रीत की शादी रूह-ए-मीत के साथ हुई, जो एग्रो बिजनेस, एग्रो प्रोडक्ट्स और प्रोसेसिंग का कार्य देखता है। उसके आधीन करीब दो सौ डेरा पदाधिकारी कार्य करते हैं।
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गुरमीत राम रहीम का परिवार
हरियाणा के सिरसा जिले में डेरा सच्चा सौदा का आश्रम 68 सालों से चल रहा है। डेरे का साम्राज्य विदेशों तक फैल हुआ है। देश में डेरा के करीब 46 आश्रम हैं और उसकी शाखाएं अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड से लेकर ऑस्ट्रेलिया और यूएई तक फैली हुई हैं। दुनिया भर में डेरे के करीब पांच करोड़ मानने वाले हैं, जिनमें से 25 लाख अनुयायी अकेले हरियाणा में ही मौजूद हैं।
डेरे के बारे में एक खास बात यह है कि सिरसा में सभी दुकानों के नाम के आगे सच शब्द लिखा जाता है। बाबा राम रहीम ने सबसे पहली फिल्म 'एमएसजी-द मैसेंजर' फरवरी 2015 में रिलीज की थी। हालांकि इसको लेकर पंजाब में विरोध हुआ, लेकिन आसपास के राज्यों में इसे खूब पसंद किया गया। इसके बाद 'एसएजी-2', 'एसएजी-ऑनलाइन गुरुकुल', 'एसएजी-द वारियर लायन हार्ट', 'हिन्द का नापाक को जवाब' आईं।