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15 साल, 200 तारीखें और 10 मिनट में राम रहीम पर फैसला, क्या है साध्वी रेप केस?

Sat, 26 Aug 2017 09:42 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बाबा गुरमीत राम रहीम केस अपडेट
15 साल लगे, तारीख-दर-तारीख 200 से ज्यादा सुनवाई हुई और 10 मिनट में राम रहीम पर फैसला सुना दिया गया। जानिए साध्वी यौन शोषण केस में बारे में।
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संत गुरमीत राम रहीम
पंचकूला सीबीआई की विशेष अदालत में शुक्रवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पेश हुए। उन्हें मामले में दोषी करार दिया गया और 28 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी। लेकिन दोषी करार दिए जाते ही, वो हो गया जिसका डर पिछले पांच दिनों से बना हुआ था। पंचकूला में जुटे लाखों डेरा प्रेमी भड़क गए और हिंसा पर उतर आए। पंचकूला के साथ साथ पंजाब में भी भारी हिंसा और आगजनी हुई।
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बाबा गुरमीत राम रहीम केस
अब भले ही इस केस में 15 साल बाद फैसला आया, मगर  केस की शुरूआत एक गुमनाम चिट्ठी से हुई थी। 24 सितंबर 2002 को एक गुमनाम चिट्ठी (प्राइम मिनीस्टर ऑफिस) पीएमओ कार्यालय, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और मीडिया के पास पहुंचती है। चिट्ठी में डेरे सच्चा सौदा साध्वियों के साथ यौन शोषण किए जाने के आरोप लगाए गए।

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बाबा गुरमीत राम रहीम केस अपडेट
पीएमओ कार्यालय ने इस चिट्ठी पर गंभीरता दिखाते हुए जांच के आदेश दिए। उधर, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए। वर्ष 2002 में सीबीआई ने जांच शुरू की। वर्ष 2003 में सीबीआई के जांच अफसर केएल रैना ने डेरे में मौजूद कुछ साध्वियों के बयान दर्ज किए। लेकिन बयानों में साध्वियों ने गलत काम किए जाने की बात नहीं कही गई। वर्ष 2005 में सीबीआई दो साध्वियों तक पहुंची।
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गुरमीत राम रहीम सिंह
इन साध्वियों ने वर्ष 2006 में सीबीआई को बयान दिए  कि  वर्ष 1999 में उनके साथ डेरे में गलत काम किया गया। साध्वियों ने डेरामुखी पर यौन शोषण के आरोप लगाए। पांच साल की गहन जांच के बाद वर्ष 2007 में सीबीआई ने बाबा के खिलाफ अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी। 4 अक्तूबर 2007 को बाबा पहली बार सीबीआई अदालत (पहले अंबाला में थी, फिर पंचकूला शिफ्ट हुई) में पेश हुए।
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गुरमीत राम रहीम सिंह
पहली पेशी में ही हुड्डा मैदान बाबा के 25 हजार से अधिक समर्थक जुटे। उसके बाद हर पेशी पर बाबा के समर्थकों की जुटने वाली भीड़ को देखते हुए सीबीआई कोर्ट ने पेशी वीडियो कांफ्रेसिंग से शुरू की। वर्ष 2008 में बाबा पर सीबीआई अदालत ने आरोप तय कर दिए गए। करीब साढ़े नौ साल चले इस ट्रायल में सीबीआई ने दो पीड़ित साध्वियों, साध्वी के जीजा, साध्वी के पिता, साध्वी के पति समेत 15 गवाह पेश किए।
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गुरमीत राम रहीम सिंह
जबकि बचाव पक्ष ने 37 लोगों की अदालत में गवाही करवाई और अब 25 अगस्त 2017 को सीबीआई अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया। जज जगदीप सिंह ने केस का फैसला सुनाया। केस में गवाह राम रहीम का ड्राइवर मुख्य गवाह है और पूरे मामले में करीब 200 से ज्यादा सुनवाइयां हुई।
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