शीर्ष महिला रेसलर फौगाट सिस्टर्स ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम में अपनी बड़ी ख्वाहिश जाहिर की।
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'दंगल' की रियल बेटी ने जाहिर की बड़ी ख्वाहिश
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, महिला रेसलर फौगाट सिस्टर पूरे देश में महिलाओं के लिए रेसलिंग अकादमी खोलना चाहती हैं। उनका मानना है कि हरियाणा सरकार की खेल नीतियों की तरह ही देश के बाकी राज्यों में भी बेहतर खेल नीति बनाई जानी चाहिए। ऐसा हुआ तो रेसलिंग की लोकप्रियता जरूर बढ़ेगी। देश के लिए तमाम मेडल जीत चुकीं गीता और बबिता फौगाट शुक्रवार को शहर के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची थीं।
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'दंगल' की रियल बेटी ने जाहिर की बड़ी ख्वाहिश
अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि हरियाणा में लड़का-लड़की में भेदभाव लोगों के मन से दूर हो रहा है। ऐसी जागरूकता दंगल जैसी फिल्मों की देन है। अब हरियाणा के पेरेंट्स अपनी बेटियों पर भी भरोसा जताने लगे हैं। सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मुहिम भी अब रंग ला रही है। लेकिन उनकी इच्छा है कि खेलों के मामले में पूरे देश का माहौल एक जैसा हो। दुख की बात यह है कि हरियाणा की तरह बाकी राज्यों में बेहतर खेल नीतियां नहीं है। यही वजह है कि प्रतिभाएं पिछड़ जाती हैं।
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अगर सरकार उनकी मदद करे तो वह रेसलिंग को देशभर में लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचाने का जज्बा रखती हैं। इसके लिए उन्होंने प्रदेश के सीएम मनोहर लाल खट्टर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर के कई नेताओं के सामने भी बात रखी है। उनकी पर बनी फिल्म दंगल की रिलीज के बाद उन्होंने बॉलीवुड के सितारों से भी मिलकर इस बारे में बात साझा की है। उन्हें उम्मीद है कि न केवल सरकार बल्कि बॉलीवुड और देश का कॉरपोरेट जगत भी इस मामले में उनकी मदद करेगा। साल 2020 के टोकियो ओलंपिक में मेडल लाने के साथ-साथ उनका लक्ष्य ये है कि रेसलिंग में हरियाणा के अलावा बाकी प्रदेशों के पहलवान भी दमदार दावेदारी पेश करें।
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जम्मू कश्मीर में अकादमी खोलना चुनौती
आमिर खान की फिल्म दंगल की एक्ट्रेस जायरा वसीम को पिछले दिनों मिली धमकी पर गीता फौगाट कहती हैं कि रेसलिंग अकादमी खोलने के सपने को साकार करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने कहा कि खासकर देश के जम्मू कश्मीर जैसे राज्य में जहां महिलाओं के प्रति कट्टर सोच के कारण उन्हें आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता। ऐसी जगह पर अगर वह रेसलिंग अकादमी खोलती हैं तो शायद इसका भी विरोध हो सकता है। इसलिए बगैर सरकारी मदद के उनकी योजना अंजाम तक नहीं पहुुंच सकती।
रेसलिंग है ओलंपिक के सिर का ताज
बबिता और गीता फौगाट ने बताया कि देश में पहलवानों के लिए सबसे बेहतर मंच प्रो रेसलिंग जैसे मुकाबले हैं। जहां तक अंतरराष्ट्रीय स्तर की बात है तो कहा जा सकता है कि रेसलिंग ओलंपिक जैसे आयोजन के सिर का ताज है। यह पूरी तरह मिट्टी से जुड़ा हुआ खेल है। अगर कभी ऐसे खेल को ओलंपिक से हटाने की बात होती है तो यह पूरे विश्व के लिए शर्मनाक होगा।