इस नवजात की किस्मत देखिए, जब जन्मा तो पिता की हत्या हो चुकी थी। मां को 3 गोलियां लगी थीं, इसे खरोंच तक न आई। देखिए, पूरा मामला।
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सोनीपत फायरिंग में घायल महिला ने दिया बच्चे को जन्म
चार साल पहले खरखौदा के प्रदीप से अंतरजातीय विवाह करने वाली सुशीला की पीठ में गोली लगी थी। पति, सास व ससुर की हत्या हो चुकी थी। ऐसे हालात में भी सुशीला ने हिम्मत नहीं हारी और प्रसव पीड़ा सहन करते हुए बेटे को जन्म दिया। बच्चे का वजन 2.2 किलोग्राम है। वह ठीक है।
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सोनीपत फायरिंग में घायल महिला ने दिया बच्चे को जन्म
हालांकि, सुशीला की हालत अब भी खतरे से बाहर नहीं है, लेकिन बेटा पूरी तरह स्वस्थ है। इस घटना के दौरान सलामत रही तीन साल की बेटी प्रिया को पता नहीं कि उसके पिता, दादा व दादी अब इस दुनिया में नहीं हैं। मां व चाचा पीजीआई रोहतक में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
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सोनीपत में परिवार के तीन सदस्यों की हत्या
परिजनों ने बताया कि प्रदीप का परिवार मूलरूप से जसौरखेड़ी (बहादुरगढ-झज्जर) के रहने वाला हैं। करीब बीस वर्ष पहले खरखौदा आकर बस गया। प्रदीप अपने पिता सुरेश, मां सुनीता, पत्नी सुशीला, छोटे भाई सूरज, बहन ललीता और तीन साल की बेटी प्रिया के साथ रह रहा था।
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सोनीपत में परिवार के तीन सदस्यों की हत्या
चार वर्ष पहले ही उसने बिधराणा-झज्जर की रहने वाली सुशीला से अंतर जातीय विवाह किया था। दोनों एमडीयू रोहतक में पढ़ते थे। शादी के बाद दोनों परिवारों में बोलचाल बंद थी। सुशीला ने प्रिया को जन्म दिया और उनकी जिंदगी हंसी-खुशी बीत रही थी।
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सोनीपत में परिवार के तीन सदस्यों की हत्या
इसी बीच सुशीला के भाई का भी उनके घर आना जाना या फिर बाहर मिलना-जुलना शुरू हो गया। लेकिन शुक्रवार रात इस परिवार पर काल बनकर टूटी। हत्याकांड में 3 लोगों की मौत हो गई थी और गंभीर रूप से जख्मी दो लोगों में से एक गर्भवती महिला की हालत नाजुक था। गोलीकांड ऑनर किलिंग के शक में अंजाम दिया गया।
गोली महिला के मुंह को चीरते हुए गर्दन में लगी। दूसरी गोली हाथ में और तीसरी कमर और पेनक्रियाज से होते हुए पेट तक पहुंच गई। वारदात के बाद जिंदगी और मौत से लड़ते हुए उसने शनिवार सुबह बेटे को जन्म दिया। गनीमत रही गोली ने गर्भस्थ बच्चे को छुआ तक नहीं। गोली बच्चेदानी में लग जाती तो जहर फैलने का खतरा था।