42 लाख की करेंसी के साथ पकड़े गए भाई-बहन ने 2000 के नकली नोट असली कागज पर छापे थे। उन्हें ये पेपर कहां से मिला, देखिए अहम खुलासा।
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नकली नोट छापने वाले भाई-बहन
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, मोहाली में नकली नोट छापने वाले गैंग का मास्टरमाइंड अभिनव ने मैसूर की उसी पेपर मिल में सेंध मारकर कागज लिया, जहां से सरकार मैसूर 2000 का नोट छपवा रही है। यह बात उस समय सामने आई, जब शनिवार को आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों का रिमांड लेने के लिए अपनी दलीलें दीं।
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नकली नोट छापने वाले भाई-बहन
पुलिस का दावा है कि आरोपी कागज मिल के किसी अधिकारी या मुलाजिम के संपर्क में था। इसके अलावा पुलिस को शक है कि अभिनव का आईएसआई से भी लिंक हो सकता है। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है। अदालत में पुलिस ने कहा कि नोट छापने के लिए सरकार चार जगह से कागज मंगवाती है। इसमें मैसूर, कोलकाता, नासिक व देवास (मध्य प्रदेश) शामिल है।
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नकली नोट छापने वाले भाई-बहन
अब तक जांच में सामने आया है कि आरोपी मैसूर कागज मिल के संपर्क में था। ऐसे में मिल में किस स्तर पर सांठगांठ थी, इस बारे में पता लगाया जाएगा। इसलिए कम से कम तीन दिन का रिमांड दिया जाए। वहीं, बचाव पक्ष की दलील थी कि अभिनव को 28 नवंबर को पकड़ा गया। जबकि एक दिन गैर कानूनी तरीके से पुलिस ने कस्टडी में रखा। फिर 29 को अदालत में पेश किया।
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42 लाख की जाली करेंसी समेत तीन गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
अब तक इस मामले में पुलिस की जांच शून्य है। पांच दिन के रिमांड के बाद भी पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा है। फिर भी अदालत ने आरोपियों को पांच दिसंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। जिक्रयोग है कि पुलिस ने 29 नवंबर को तीनों आरोपियों अभिनव वर्मा, उसकी कजिन विशाखा व सूरज नागपाल को जगतपुरा से पकड़ा था। नोटबंदी के बाद की यह पुलिस की सबसे बड़ी जाली करेंसी की रिकवरी थी।
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मोहाली में नकली नोट बनाने वाला गिरोह पकड़ा
पुलिस को जांच में पता चला है कि अभिनव वर्मा 16 देशों की यात्रा कर चुका है। ऐसे में उसके कई देशों में लिंक है। पुलिस को संदेह है कि इसका लिंक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी हो सकता है। पुलिस अब इस दिशा में भी काम कर रही है। ऐसे में पुलिस उसके सभी संपर्कों को तलाश रही है।
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नकली नोट चलाने वाले गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
अदालत में पुलिस ने कहा कि आरोपी का कारोबार कई देशों तक फैला है। वह अपना कारोबार आनलाइन चलाता था। ऐसे में वह किन लोगों के संपर्क में है। इसकी पूरी डिटेल पुलिस खंगालेगी। इसके लिए पंजाब पुलिस का साइबर सेल जांच करेगा। ऐसे में उन्हें आरोपी की ईमेल आईडी, उसके पासवर्ड व अन्य दस्तावेज उपलब्ध करवाए जाए। हालांकि बचाव पक्ष ने कहा कि वह अपनी तरफ से जानकारी देने में पूरा सहयोग करेंगे।
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नकली नोट चलाने वाले गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
बचाव पक्ष के वकील नवीन सैनी ने कहा कि आरोपियों को किस स्थान से काबू किया गया है। यह बात उनके गले से नहीं उतर रही है। क्योंकि एक तो एफआईआर में पुलिस ने बाकरपुर दिखाया है। मीडिया रिपोर्ट में यह बात आई थी कि पुलिस ने उन्हें जगतपुरा टी प्वाइंट से काबू किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने आरोपियों को जीरकपुर में रमाडा पैलेस के पास से पकड़ा है। उनके पास इस संबंधी पुख्ता प्रमाण है। जो कि हम अदालत में फाइल करेंगे।
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नकली नोट चलाने वाले गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने बताया कि उक्त मामला सामने आने के बाद ठगी का शिकार हुए लोग भी अब सामने आने लगे हैं। अब तक तीन लोग सामने आए हैं। उन्होंने पुलिस को इस संबंधी शिकायत भी दी है। इनमें गुरमेल सिंह व हरनेक सिंह निवासी मुल्लांपुर दोनों भाई हैं। जबकि तीसरा व्यक्ति सोहनप्रीत है। दोनों से दस-दस लाख ठगे थे। जबकि सोहनप्रीत से तीन लाख ठगे थे।
इस दौरान बचाव पक्ष के वकील ने एक तर्क अदालत में रखा, जिसे सुनकर कोई भी अपनी हंसी को रोक नहीं पाया। उन्होंने बताया कि जो एफआईआर की जो कॉपी उन्हें मिली है। उसमें पुलिस ने केस दर्ज करने की तिथि 28-11-2019 को दिखाया है। ऐसे में पुलिस कितनी एक्टिव हो गई कि उसने तीन साल पहले आरोपी को पकड़कर केस दर्ज कर लिया। इसके बाद अदालत हंसी से गूंज उठी।