जो युवा पीएम मोदी के 'मेक इन इंडिया' प्रोजेक्ट में शामिल हो, फैमिली आर्मी में हो, वो जाली नोटों का मास्टरमाइंड निकलेगा, कोई सोच नहीं सकता।
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नकली नोट चलाने वाले गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
बात हो रही है, 42 लाख के जाली करंसी सहित पकड़े गए 21 साल के बीटेक पास युवा अभिनव की। अभिनव अपनी बहन विशाखा के साथ मिलकर जाली नोट छापता था और 30 प्रतिशत कमिशन पर 1000 और 500 के पुराने नोट बदलने का काम कर रहा था। इस तरह करीब 38 लाख के नोट इन्होंने चला भी दिए।
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जाली नोट कांड का मास्टरमाइंड अभिनव पीएम नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने वालों की लिस्ट में है। अभिनव ने ब्लाइंड लोगों के लिए एक ऐसी तकनीक विकसित की थी, जिससे उन्हें स्टिक का सहारा नहीं लेना पड़ता। अभिनव ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जिसको दृष्टिहीन अंगूठी की तरह पहन सकते हैं।
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अभिनव के इस उपकरण को पहनने से दृष्टिहीन के सामने कोई भी चीज आने पर सैंसर आवाज करता है। इसकी खोज के लिए इसका नाम 'मेक इन इंडिया' में चल रहा है। वह लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में नाम दर्ज कराने की तैयारी कर रहा था। चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित लाइव वेरल सॉल्यूशन नाम की कंपनी में इनका ऑफिस है।
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21 साल के आरोपी अभिनव के पिता हरियाणा गवर्नमेंट में अच्छे पद पर थे, लेकिन पिछले साल ही उनकी मौत हो गई। अभिनव की मां लेफ्टिनेंट कर्नल हैं। उसके साथ गिरफ्तार हुई मामा की बेटी विशाखा ने भी बीटेक की हुई है। 20 वर्षीय विशाखा कूपरथला में मकान नंबर 202, सी टाइप-रेलवे फैक्टरी में रहती है।
अभिनव और विशाखा कालेधन को सफेद करने के लिए मोटा कमीशन लेते थे। 2000 के नोटों की गड्डियों में ऊपर के दो नोट असली होते थे, बाकी नकली। पुलिस ने दोनों को मोहाली जाते समय गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक अब तक इन्होंने 80 लाख की जाली करेंसी छापी थी। एक बिचौलिए को भी इनके साथ पकड़ा गया।