करीब 3 साल पहले घर से भागी 10 की छात्रा दिल्ली में पहली बार बिकी। फिर लुधियाना में तीन बार बिकी। खुलासा हुआ तो घर पहुंच गई, लेकिन रह न पाई। दरअसल, चौथी बार उसे 2 साल पहले उसे किसान कर्म सिंह ने 30 हजार रुपये में खरीदा था और उससे शादी कर ली थी। वहां पर वह कर्म सिंह की पत्नी सिमरजीत कौर के रूप में रह रही थी, जिसका एक बच्चा भी है। उसका दूसरा बच्चा उसके पेट में है।
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युवती की दर्दनाक कहानी
सिरसा के ओढां थाना क्षेत्र में यह घटना फिल्मी घटना से कम नहीं थी क्योंकि महाराष्ट्र और ओढां पुलिस ने गांव घुकांवाली के एक खेत में दबिश देते हुए एक गुमशुदा लड़की अर्पणा को बरामद किया। उक्त लड़की पिछले कई वर्षों से महाराष्ट्र के पुणे शहर से गायब थी। घटना के बाद पुलिस ने लड़की अर्पणाके पति और उसके परिजनों को थाने में तलब किया। बरामद लड़की के परिजनों ने बताया कि उनकी 15 वर्षीय बेटी परीक्षा में कम नंबर आने के कारण परिजनों के भय से पुणे से दिल्ली की ट्रेन में करीब चार वर्ष पूर्व सवार होकर चली गई थी। इसके बाद उन्होंने लड़की की काफी तलाश की लेकिन उसका कोई पता नहीं लगा।
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इसके चलते परिजनों ने पुणे महाराष्ट्र पुलिस में गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज करवा दिया। अर्पणा ने कुछ दिन पूर्व अपने घर पुणे फोन करके अपनी मां को बताया था कि वो घुक्कांवाली गांव में है। उसे यहां बेच दिया गया है। वे उसको आकर ले जाएं। इस पर उसके पिता संजय बाबू राव और मां अर्चना राव पुणे पुलिस की सब इंस्पेक्टर केतकी चौहान के साथ ओढां पुलिस को लेकर लड़की के बताए ठिकाने पर घुक्कांवाली पहुंचे तो अर्पणा खेत में काम कर रही थी। वहां से पुणे पुलिस अर्पणा को अपने साथ ले गई थी, जबकि अर्पणा का बच्चा उसके दादा को सौंपते हुए उसके पिता कर्मसिंह को आरोपी माना गया था।
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अर्पणा फैमिली वालों के साथ हरियाणा से पुणे चली गई थी, लेकिन अपने मासूम बेटे को भुला नहीं सकी। उसकी ममता ने वापस ससुराल आने पर मजबूर कर दिया। उसने अपने परिवार को समझाया तो राजी हो गए और उसके बाद फैमिली वालों ने उसके पति कर्मसिंह को पुणे बुलाया। जहां से खुशी-खुशी अर्पणा को कर्मसिंह की पत्नी सिमरजीत कौर के रूप में सिरसा भेज दिया। अर्पणा के साथ उसकी मां अर्चना राव ने बयान दर्ज कराए कि वे कर्म सिंह और अर्पणा के रिश्ते को सहमति देते हैं।
अर्पणा ने भी पुणे पुलिस और ओढां पुलिस को बयान दिया कि वह अपनी इच्छा से कर्मसिंह के साथ जिंदगी बिताना चाहती है। उसके बाद सब गांव घुक्कांवाली गए। गांव पहुंचने पर उनके फैमिली वालों और गांववासियों ने उनका स्वागत करते हुए अर्पणा और उसके मां-बाप का शुक्रिया कहा।