एक क्रिकेटर बनने के लिए कितनी मेहनत लगती है वो आप इनकी असल जिंदगी से जान सकते हैं, देखिए
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cricketer arshdeep singh
मां दलजीत कौर ने बताया कि अर्शदीप खरड़ से चंडीगढ़ स्थित क्रिकेट अकादमी तक जाने के लिए रोजाना साइकिल पर सफर करता था। उसने जितना पसीना बहाया है, मैं गवाह हूं इस बात की। अर्शदीप सिंह बांए हाथ के गेंदबाज हैं। आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप की विजेता टीम के मेंबर रहे।
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अर्शदीप सिंह टूर्नामेंट में अधिक मैच नहीं खेले, लेकिन दो मुकाबलाें में कुल 3 विकेट लिए हैं। अर्शदीप सिंह के पिता डीसीएम में चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर हैं और उनकी मां दलजीत कौर एक हाउस वाइफ हैं। भारत के वर्ल्ड कप जीतने पर इनके घर और परिवार में खुशी का माहौल बना हुआ है। अर्शदीप सिंह चंडीगढ़ के एसडी कॉलेज-32 में बीए प्रथम वर्ष के स्टूडेंट हैं। चंडीगढ़ के सेक्टर-36 स्थित गुरु नानक पब्लिक स्कूल (जीएनपीएस)-36 की क्रिकेट अकादमी के ट्रेनी हैं।
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क्रिकेट केलिए कड़ा संघर्ष
मां अर्शदीप कौर ने बताया कि बेटे अर्शदीप को शुरू से ही क्रिकेट से लगाव रहा। इसी को देखते हुए हमने उसे चंडीगढ़ की जीएनपीएस 36 में क्रिकेट अकादमी में डाल दिया। खरड़ से रोजाना अर्शदीप सिंह साइकिल से क्रिकेट सीखने के लिए आता जाता रहा। स्कूल से अभ्यास के लिए सुबह जाता और देर शाम को घर वापिस लौटता था। यह रूटीन पिछले 7 साल तक चला। अब वह 19 साल का हो गया है। पिछले ही वर्ष हमने उसे मोटर साइकिल लेकर दी है। मां ने कहा क्रिकेट के लिए मेरे बेटे ने काफी संघर्ष किया है।
पिता भी गेंदबाज
अर्शदीप सिंह के पिता दर्शन सिंह ने बताया कि वह खुद भी क्रिकेटर रहे हैं और मीडियम पेसर गेंदबाज थे। गुरदासपुर से खेलते इंटर स्टेट, कटोच शील्ड खेल चुके हैं। दर्शन सिंह ने कहा कि बेटे की मेहनत से आज वह इस मुकाम तक पहुंचा है। हाल ही में एशिया कप में अर्शदीप के प्रदर्शन की बदौलत उसे अंडर 19 वर्ल्ड कप टीम में जगह दी गई। इस टूर्नामेंट में बेटे को केवल दो ही मैच खेलने को मिले, उसमें भी उसने तीन विकेट चटकाए। वापिस आने पर परिवार और रिश्तेदाराें की ओर से अर्शदीप को पार्टी दी जाएगी।