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राजनीति के दिग्गज डा. बलराम जाखड़ से जुड़ी 9 खास बातें

Sun, 07 Feb 2016 04:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब)
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पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री व लोकसभा स्पीकर और मध्यप्रदेश के पूर्व राज्यपाल डा. बलराम जाखड़ आज भले ही हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनके राजनीति में दिए योगदान को नकारा नहीं जा सकता। उनके जीवन और राजनीतिक कैरियर से जुड़ी 9 खास बातें।
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कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेता डा. बलराम जाखड़ का जन्म 23 अगस्त, 1923 को तत्कालीन फिरोजपुर, वर्तमान में फाजिल्का जिले के गांव पंचकोसी में हुआ। वह जाखड़ वंश के जाट परिवार में पैदा हुए थे। उनके पिता का नाम चौधरी राजाराम जाखड़ और मां का नाम पातोदेवी जाखड़ था।
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बलराम जाखड़ ने 1945 में फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज, लाहौर (अब पाकिस्तान) से संस्कृत में डिग्री प्राप्त की। इसके अलावा उन्हें अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू और पंजाबी भाषा का भी अच्छा ज्ञान था। साल 1972 में विधानसभा में चयनित होने के साथ बलराम जाखड़ के राजनैतिक जीवन की शुरूआत हुई।

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बलराम जाखड़ ने राजस्थान के जिले के सीकर से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया और सन 1980 से 10 साल तक लोकसभा अध्यक्ष रहे। 1977 में आपात्काल के कारण देश भर में व्याप्त कांग्रेस विरोधी लहर के बावजूद पुन: विधायक चुने गए थे और उन्हें नेता प्रतिपक्ष का पद मिला।
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1977 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से डा. बलराम जाखड़ चुनाव मैदान में उतरे और जेएनपी पार्टी के प्रत्याशी चौ. सत्यदेव को भारी मतों से पराजित किया। इसके बाद 1980 में लोकसभा चुनाव में डा. बलराम जाखड़ ने अकाली प्रत्याशी इकबाल सिंह को करीब एक लाख 94 हजार मतों से पराजित किया था।
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बाद में डा. जाखड़ 1980 में फिरोजपुर क्षेत्र से रिकार्ड तोड़ बहुमत के साथ सांसद चुने गए। जनवरी 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इन्हें धरती पुत्र बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष पद उनके लिए प्रस्तावित किया। न केवल 1980 बल्कि 1984 में भी डा. जाखड़ निर्विरोध लोकसभा अध्यक्ष चुने गए।
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साल 1980 से 1989 तक लोकसभा अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने लोकसभा की लाइब्रेरी विकसित की और रिसर्च को बढ़ावा दिया। पार्लियामेंट से जुड़ी चीजों का म्यूजियम, तथ्यों का कंप्यूटराइजेशन, मशीनों का ऑटोमेशन वगैरह करवाने में उनकी बड़ी भूमिका रही।

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1991 में जब पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने तो डा. जाखड़ को केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में किसानों के उत्थान का अवसर भी प्राप्त हुआ। तब फसली विभिन्नता और किसानों को सुरक्षा कवच उपलब्ध करवाने की दिशा में अभूतपूर्व प्रयास किए गए।

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भारत कृषक समाज व जलियांवाला बाग ट्रस्ट के अध्यक्ष पद का कार्य करने वाले डा. जाखड़ को अपने पैतृक गांव मौजगढ़ व पंजकोसी के रेगिस्तानों में फल उत्पादन करने का श्रेय प्राप्त हुआ। वर्ष 1975 में राष्ट्रपति ने उद्यान पंडित पुरस्कार से भी सम्मानित किया। डा. जाखड़ मध्यप्रदेश के राज्यपाल भी रहे।
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डॉ. बलराम जाखड़ के तीनों बेटे राजनीति में शामिल हुए। बड़े बेटे सज्जन कुमार जाखड़ पंजाब के पूर्व मंत्री हैं। दूसरे बेटे सुरिंदर कुमार जाखड़ की गोली लगने से 17 जनवरी 2011 को फिरोजपुर में मौत हो गई। सुनील जाखड़ कांग्रेस विधायक दल के पूर्व नेता रहे हैं। इसके अलावा दो बेटियां हैं।

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