हम आपको बता रहे हैं, उस 'कॉमेडी किंग' के बारे में, जिनकी 'मौत' भी लोगों को जीना सिखाती है। इंजीनियर कहें या कार्टूनिस्ट, अभिनेता कहें या डायरेक्टर-प्रोड्यूसर, व्यंग्यकार कहें या कॉमेडियन, इन्हें लोग कभी भुला नहीं सकते।
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jaspal bhatti
ये हैं कॉमेडियन जसपाल भट्टी, जिनका आज जन्मदिन है। 2012 में सड़क हादसे में 57 साल की उम्र में जसपाल भट्टी का निधन हो गया था। 2013 में चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस ने भट्टी को एक साल के लिए ब्रांड एंबेसडर बनाया था। पुलिस का मानना था कि भले ही पीछे की सीट पर बेल्ट बांधने का रूल नहीं है, लेकिन अगर उन्होंने बेल्ट बांधा होता तो शायद आज वे जिंदा होते। पुलिस ने भट्टी को एंबेसडर बनाकर लोगों को सीट बेल्ट बांधने के लिए प्रेरित किया।
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3 मार्च, 1955 को अमृतसर में जन्मे जसपाल भट्टी में कॉमेडी अभिनय जन्मजात था। कॉमेडी की दुनिया में जसपाल भट्टी के अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2013 में पद्मभूषण (मरणोपरांत) ने नवाजा था। उनका फिल्मी करियर लगभग 12 साल का था। इसमें उन्होंने 18 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। जसपाल भट्टी 80 दशक के अंत में दूरदर्शन में शुरू हुए उल्टा-पुल्टा शो के जरिए चर्चा में आए थे। इस शो से पहले जसपाल भट्टी चंडीगढ़ में ट्रिब्यून अखबार में एक कार्टूनिस्ट के रूप में काम करते थे।
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कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी
कार्टूनिस्ट होने के नाते ही उन्हें आम आदमी से जुड़ी समस्याओं और व्यवस्था पर व्यंग्य करके लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का मौका भी प्राप्त हुआ। अपनी इसी प्रतिभा के चलते शो उल्टा पुल्टा को जसपाल भट्टी बहुत रोचक बना पाए। जसपाल भट्टी की विशुद्ध सामाजिक कॉमेडी जनता के बीच हमेशा रहेगी। जसपाल भट्टी को द्विअर्थी संवादों और उल जलूल हरकतों के बिना स्वस्थ कॉमेडी का किंग कहा जाता है। परिवार वाले चाहते थे कि वो इंजीनियर बने, इसलिए उन्होंने चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
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कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी
लेकिन इंजीनियरिंग उन्हें रास नहीं आई और उन्होंने कॉलेज के जमाने से ही अपना जीवन हास्य और व्यंग्य के नाम कर दिया। कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने नॉनसेंस क्लब बनाया और नुक्कड़ नाटक करने लगे। इस क्लब से सैंकड़ों लोग जुड़ गए और लोगों को भट्टी के स्ट्रीट शो काफी पसंद आए। भट्टी की खासियत यही रही कि उन्होंने व्यंग्य विधा के बीच जनता के मुद्दों को बहुत सहज तरीके से मंच पर उठाया। साल 1999 में आई पंजाबी फिल्म 'माहौल ठीक है' के जरिए जसपाल भट्टी ने पुलिस और कानून व्यवस्था पर व्यंग्य के तीर छोड़े। इसी फिल्म के जरिए भट्टी बड़े पर्दे पर आए।
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कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी
इसके बाद भी उन्होंने कई पंजाबी और हिंदी फिल्मों में काम किया। 90 के दशक के शुरू में जसपाल भट्टी दूरदर्शन के लिए एक और धारावाहिक फ्लॉप शो लेकर आए, जो बहुत प्रसिद्ध हुआ। इसके बाद भट्टी की पहचान कार्टूनिस्ट की बजाय एक हास्य अभिनेता के रूप में होने लगी। आम चीजों को, आम बातों को वह बहुत ही खास और खूबसूरत अंदाज से पेश करते थे। भट्टी जी लोगों की समस्याओं को अपने सरल से अंदाज में बड़े ही आसानी से सुलझा देते थे। जब अन्ना हजारे ने जंतर-मंतर पर आंदोलन छेड़ा तो जसपाल भट्टी ने वहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
भट्टी ने टीवी के लिए फ्लॉप शो, फुल टेंशन, हाय जिंदगी बाय जिंदगी और थैंक्यू जीजाजी जैसे कार्यक्रम किए। इनमें जसपाल के साथ उनकी पत्नी सविता भट्टी ने भी सराहनीय काम किया। सभी शो चर्चित रहे और जनता को बेहद पसंद आए। टीवी पर झंडे गाड़ने के बाद जसपाल भट्टी ने फिल्मी दुनिया में भी हाथ आजमाया। भट्टी ने फिल्म 'फना', 'कुछ मीठा हो जाए', 'कुछ ना कहो', 'कोई मेरे दिल से पूछे', 'हमारा दिल आपके पास है', 'आ अब लौट चलें', 'इकबाल', 'कारतूस' में काम किया।