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स्मृति विशेष: इंजीनियरिंग छोड़कर 'कॉमेडी किंग' बना था ये शख्स, जानिए कौन है?

Wed, 25 Oct 2017 01:45 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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जसपाल भट्टी - फोटो : File Photo
पेशे से इंजीनियर था, पर हंसना और हंसाना अच्छा लगता था। इसलिए क्लब बना लिया और कॉमेडी का किंग बन गया। पुण्यतिथि के मौके पर जानिए उस शख्स के बारे में सब कुछ।
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कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी
फिल्म हो या टीवी या फिर कोई गंभीर मसला, जसपाल भट्टी हर किसी को हंसा देते थे। हिंदी सिनेमा के इस जाने-माने हास्य अभिनेता का जन्म 3 मार्च, 1955, अमृतसर में हुआ। उनका फिल्मी करियर लगभग 12 साल का था। इसमें उन्होंने 18 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। जसपाल भट्टी 80 दशक के अंत में दूरदर्शन में शुरू हुए उल्टा - पुल्टा शो के जरिए चर्चा में आए थे।
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कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी
इस शो से पहले जसपाल भट्टी चंडीगढ़ में ट्रिब्यून अखबार में एक कार्टूनिस्ट के रूप में काम करते थे। कार्टूनिस्ट होने के नाते ही उन्हें आम आदमी से जुड़ी समस्याओं और व्यवस्था पर व्यंग करके लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का मौका भी प्राप्त हुआ। अपनी इसी प्रतिभा के चलते शो उल्टा पुल्टा को जसपाल भट्टी बहुत रोचक बना पाए। जसपाल भट्टी की विशुद्ध सामाजिक कॉमेडी जनता के बीच हमेशा रहेगी।

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कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी
जसपाल भट्टी पेशे से इंजीनियर थे लेकिन इंजीनिरिंग उन्हें रास नहीं आई और उन्होंने कॉलेज के जमाने से ही अपना जीवन हास्य और व्यंग्य के नाम कर दिया। साल 1999 में आई पंजाबी फिल्म माहौल ठीक है के जरिए जसपाल भट्टी ने पुलिस और कानून व्यवस्था पर व्यंग्य के तीर छोड़े। इसी फिल्म के जरिए भट्टी बड़े पर्दे पर आए। इसके बाद भी उन्होंने कई पंजाबी और हिंदी फिल्मों में काम किया।
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कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी
90 के दशक के शुरू में जसपाल भट्टी दूरदर्शन के लिए एक और धारावाहिक फ्लॉप शो लेकर आए, जो बहुत प्रसिद्ध हुआ। इसके बाद भट्टी की पहचान कार्टूनिस्ट की बजाय एक हास्य अभिनेता के रूप में होने लगी। कॉमेडी की दुनिया में उन्होंने अपनी एक अलग ही पहचान बनाई थी। आम चिजों को, आम बातों को वह बहुत ही खास और खूबसूरत अंदाज से पेश करते थे। भट्टी जी लोगों की समस्याओं को अपने सरल से अंदाज में बड़े ही आसानी से सुलझा देते थे।
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Jaspal Bhatti - फोटो : File Photo
जसपाल भट्टी ने बॉलीवुड की पच्चीस से ज्यादा फिल्मों में छोटी बड़ी भूमिकाएं निभाई हैं। लेकिन छोटे पर्दे के लिए इनका प्यार और लगाव हमेशा ही दिखता रहा है। भट्टी कॉमेडी शो के जज के रूप में भी दिखे तो नच बलिए जैसे शो में जजों के सामने नाचते हुए भी दिखे। महंगाई और भ्रष्टाचार जिन दो मुद्दों से सरकार के साथ-साथ आम जनता भी रोज लड़ रही है उन्हीं मुद्दों को उन्होंने काफी सरलता से लोगों के सामने रखा।
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कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी
जसपाल भट्टी हमेशा इन मुद्दों पर लड़ने को तैयार रहते थे तभी जब अन्ना हजारे ने जंतर-मंतर पर आंदोलन छेड़ा तो जसपाल भट्टी ने वहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। जसपाल भट्टी अपनी फिल्म 'पावर कट' के प्रोमोशन के दौरान भी भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी शैली में आवाज उठा रहे थे। इस फिल्म के प्रोमोशन से लौटते वक्त उनकी गाड़ी का एक्सिडेंट हो गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

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कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी
जसपाल भट्टी को द्विअर्थी संवादों और उल जलूल हरकतों के बिना स्वस्थ कामेडी का किंग कहा जाता है। परिवार वाले चाहते थे कि वो इंजीनियर बने, इसीलिए उन्होंने चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। लेकिन कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने नान्सेंस क्लब बनाया और नुक्कड़ नाटक करने लगे। इस क्लब से सैंकड़ों लोग जुड़ गए और लोगों को भट्टी के स्ट्रीट शो काफी पसंद आए।

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कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी
भट्टी की खासियत यही रही कि उन्होंने व्यंग्य विधा के बीच जनता के मुद्दों को बहुत सहज तरीके से मंच पर उठाया। भट्टी ने टीवी के लिए फ्लॉप शो, फुल टेंशन, हाय जिंदगी बाय जिंदगी और थैंक्यू जीजाजी जैसे कार्यक्रम किए। इनमें जसपाल के साथ उनकी पत्नी सविता भट्टी ने भी सराहनीय काम किया। सभी शो चर्चित रहे और जनता को बेहद पसंद आए। भारत सरकार ने उन्हें 2013 में पद्मभूषण (मरणोपरांत) ने नवाजा था।

 

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कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी
जसपाल भट्टी ने फिल्मी दुनिया में भी हाथ आजमाया। भट्टी ने फिल्म 'फना', 'कुछ मीठा हो जाए', 'कुछ ना कहो', 'कोई मेरे दिल से पूछे', 'हमारा दिल आपके पास है', 'आ अब लौट चलें', 'इकबाल', 'कारतूस' जैसी कई फिल्मों में काम किया। इनमें भट्टी के काम की सराहना भी हुई। भट्टी जिस समय सड़क हादसे का शिकार हुए, वो फिल्म के प्रचार के लिए ही जा रहे थे। स्वस्थ कॉमेडी के किंग जसपाल भट्टी को हमारी श्रद्धांजलि।
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कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी
भट्टी की खास बात दूसरों पर हंसना नहीं, बल्कि खुद पर हंसकर दूसरों को हंसाना थी। इसकी एक बानगी उनकी बेवसाइट पर जाने पर दिखती है। वेबसाइट पर वह अपना परिचय कुछ इस अंदाज़ में देते थे, ‘मैं सनडे ट्रिब्यून में नियमित कॉलम लिखता हूँ, जिसकी वजह से ही उसकी बिक्री घटती जा रही है। वे मानते थे कि एक दायरे में रहकर हंसाना कठिन कला है और इसका प्रसार होना चाहिए। उनका मानना था कि बिना फूहड़पन के हंसाना एक इबादत की तरह है।
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