आज 14 नवंबर यानि बाल दिवस है, लेकिन जरा इन तस्वीरों को देखिए और बताइए कि क्या चाचा नेहरु का चिल्ड्रन्स डे ऐसा होता है। आपको झकझोर देगा सच, कड़वा है।
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बाल दिवस
ये सभी तस्वीरें चंडीगढ़ की हैं। देश भर में बाल दिवस पर जहां स्कूलों में कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, वहीं ये बालमन जानते भी नहीं कि बाल दिवस होता क्या है। स्कूल क्या होता है, जद्दोजहद है तो बस रोजी रोटी कमाने की और इसमें मशगूल ये बच्चे क्या जानते होंगे कि 14 नवंबर बाल दिवस को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु का जन्म हुआ था।
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बाल दिवस
नहीं, ये बच्चे हर रोज अपने बालमन को छोड़कर पैसा कमाने या रोजी रोटी की तलाश में यूं ही सड़कों पर भटकते रहते हैं। बाल मजदूरी पर सरकार हर साल बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर काम कर रहे ये बच्चे, बाल मजदूरी के दायरे में नहीं आते क्या। क्या इन बच्चों के स्कूल और किताबों के कोई मायने नहीं हैं, खेल कूद का मतलब नहीं है।
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बाल दिवस
सांसद किरण खेर ने यूटी प्रशासन के सामने शहर में भीख मांगते बच्चों और उनसे लोगों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया है। चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार परिमल राय और एसएसपी जगदले नीलांबरि विजय को लिखे अलग-अलग पत्रों में उन्होंने इस मामले को निजी तौर पर देखने की बात कही। साथ ही भीख मांगते बच्चों की समस्या को खत्म करने को कहा है।
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बाल दिवस
अपने पत्र में सांसद ने स्पष्ट किया है कि शहरवासी बाल भिखारियों से पीड़ित हैं। खासकर शहर के राउंड अबाउट्स, ट्रैफिक लाइट प्वाइंट्स और बाजारों में बाल भिखारियों की संख्या काफी रहती है, जो लोगों को परेशान करते हैं। वे अक्सर ट्रैफिक लाइट्स पर उनके वाहनों के सामने आ जाते हैं और कई बार पैसे मांगने के लिए उनके वाहनों की खिड़कियों को जोर-जोर से पीटते हैं।
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इसी तरह से बाजारों में भी बाल भिखारी पैसे मांगने के लिए लोगों के पीछे पड़ जाते हैं। खेर के अनुसार शहर के लोग उनके कार्यालय में यह शिकायत लेकर आते हैं कि प्रशासन की ओर से इस समस्या को खत्म करने के लिए किसी तरह के प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
अपने पत्र में सांसद खेर ने आगे स्पष्ट किया है कि भीख मांगने के कारण बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं और इससे उनके बाल अधिकारों का भी हनन होता है। सांसद ने लिखा कि ऐसे बच्चों को शारीरिक, मौखिक और यौन शोषण का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे अपराध न हो, इससे पहले ही समाधान जरूरी है।