चंडीगढ़ मेयर चुनाव में जब कांग्रेस की जीत का ऐलान हुआ तो सांसद किरण खेर के तेवर कुछ ऐसे थे, तस्वीरें।
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जब भाजपाई हारे तो देखिए, किरण के ऐसे थे इशारे
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उम्मीदवार तय करने के लिए किरण खेर ने सीक्रेट वोटिंग करवाई। उसी दिन से भाजपा में गुटबाजी नजर आने लगी थी, जिसका कांग्रेस ने बखूबी फायदा उठाया।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन ने डिनर डिप्लोमेसी का जो तरीका अपनाया, वह भी हार की वजहों में से एक था।
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मनोनीत पार्षदों ने इसमें शामिल नहीं होकर तस्वीर साफ कर दी और आखिरकार डिनर ही रद्द करना पड़ा। भाजपा के लिए बिगड़े इस माहौल को कांग्रेस ने समय रहते भांप लिया।
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भाजपा के सभी बड़े नेता एक साथ नहीं चले। पूर्व सांसद सत्यपाल जैन केवल देवेश मोदगिल को डिप्टी मेयर बनाने के लिए ही लॉबिंग करते रहे।
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मेयर उम्मीदवार तय होते ही सांसद किरण खेर दुबई चली गईं और चुनाव से दो दिन पहले लौटीं। इस एक हफ्ते में यदि वह मेयर उम्मीदवार के लिए प्रयास करतीं तो नतीजा कुछ और हो सकता था।
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बसपा पार्षद जन्नत जहां ने हरमोहन धवन पर धमकाने का आरोप लगाया था। चुनाव से ठीक पहले भी यह मुद्दा गर्माया रहा। इसे भी हार के कारणों में एक माना जा रहा है।
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यह जानते हुए कि मनोनीत पार्षद आशा जसवाल के हक में हैं, फिर भी पार्टी ने हीरा नेगी को उम्मीदवार बनाया। अधिकतर मनोनीत पार्षद हीरा नेगी को वोट देने के मूड में नहीं थे।
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सांसद बनने के बाद मेयर चुनाव किरण खेर के लिए पहला टेस्ट था, लेकिन वह इस मौके को भुना नहीं सकी।
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क्योंकि हीरा नेगी को किरण खेर ने अपनी पसंद से उम्मीदवार बनाया था। उन्हें उम्मीदवार बनाने के लिए उन्होंने पार्टी की कोर कमेटी की प्रक्रिया को भी ताक पर रख दिया था। इसके बावजूद वह नेगी को नहीं जिता सकीं।
मेयर चुनाव में मुंह की खाने के बाद भाजपा के नेता अब एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगे हैं। सूत्रों का कहना है कि चुनाव के नतीजे आते ही किरण खेर ने अपना गुस्सा पार्षदों पर उतारना शुरू कर दिया।