ब्रेन स्ट्रोक (पैरालिसिस या लकवा) के मरीजों के लिए समय बहुत ही मायने रखता है। यदि पेशेंट समय पर अस्पताल पहुंच जाए तो उसकी विकलांगता को काफी हद तक बचाया जा सकता, लेकिन इससे बड़ी दिक्कत ब्रेन स्ट्रोक की दवाई टीपीए (टिश्यू प्लाजमाइनोजेन एक्टीवेटर) का इंतजाम करना। ब्रेन स्ट्रोक की दवाई कीमत करीब 35 से 60 हजार रुपये है। स्ट्रोक होने के साढ़े चार घंटे के भीतर मरीज को यह दवा हर हालत में मिल जानी चाहिए।
करीब 15 फीसदी मरीज बिना इलाज के वापस चले जाते हैं। पंजाब और हिमाचल प्रदेश के अस्पतालों में यह दवाएं मुफ्त में दी जाती हैं। एम्स में भी मरीजों को राहत दी जाती है, मगर न तो पीजीआई में इस तरह का प्रावधान है और न ही मेडिकल कालेज में। पीजीआई व मेडिकल कालेज के डॉक्टरों का कहना है कि यूटी प्रशासन को इसमें दखल देना चाहिए और प्राथमिकता के तौर पर मरीजों को मुफ्त दवा देने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।