हथियारों,ड्रग मनी और हेरोइन के साथ पकड़े गए इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह के लिए अब आने वाले दिन बहुत बुरे हो सकते हैं। आरोपी इंस्पेक्टर को अदालत में घेरने की पूरी रणनीति तैयार हो गई है।
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Inderjeet singh arrested
20 करोड़ की हेरोइन और हथियारों की खेप समेत गिरफ्तार इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह के खिलाफ चार सीनियर अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद केस दर्ज किया गया है। इसमें तीन आईपीएस अधिकारियों की जांच रिपोर्ट है, जिसको केस दर्ज करने का आधार बनाया गया है। यही नहीं केस एडीजीपी एसटीएफ हरप्रीत सिंह सिद्धू की ओर से रिपोर्ट पर सिफारिश के बाद दर्ज किया गया है। ऐसे में इस केस में कोई ढील की गुंजाइश नहीं है।
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Inderjeet singh arrested
आला अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक डीजीपी सुरेश अरोड़ा के पास ऐसे 13 केसों की लिस्ट आई थी, जिसमें तस्करों से करोड़ों रुपये की हेरोइन बरामद हो गई थी और फिर भी आरोपी कोर्ट से बरी हो गई। एक केस में तो 19 किलो हेरोइन यानी 95 करोड़ की नशे की खेप पकड़ी गई, लेकिन आरोपी आसानी से बरी हो गए। इन केसों की बारीकी से जांच के लिए एसटीएफ के चीफ हरप्रीत सिंह सिद्धू को जिम्मेदारी दी गई थी।
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Inderjeet singh arrested
केसों की जांच के लिए आईजी बार्डर रेंज नौनिहाल सिंह, आईजी खुफिया आरके जयसवाल व एसएसपी तरनतारन को जिम्मेदारी दी गई तो इस जांच में पता चला कि हेरोइन तस्करों पर मेहरबानी की गई है। इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार कर इन अधिकारियों ने एडीजीपी हरप्रीत सिंह सिद्धू को सौंपी। एडीजीपी एसटीएफ हरप्रीत सिंह सिद्धू ने कानूनी परामर्श लेने के बाद केस में दर्ज करने की सिफारिश कर दी।
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punjab transfer
केस एडीजीपी एसटीएफ की सिफारिश पर दर्ज हुआ है, ऐसे में हर कानूनी पहलू को बारीकी से खंगाला जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक आईजी नौनिहाल सिंह, आईजी आरके जयसवाल की पंजाब पुलिस में छवि दमदार व इमानदार अधिकारियों के तौर पर बनी हुई है। नौनिहाल सिंह तो लंबे समय तक चंडीगढ़ के एसएसपी व उच्चाधिकारी तैनात रह चुके हैं, जबकि जयसवाल पंजाब में कई विभागों में काम कर चुके हैं।
एसटीएफ चीफ हरप्रीत सिंह सिद्धू का विभाग में खासा दबदबा है। उनकी गिनती दमदार अधिकारियों में होती है और उनको पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विशेष तौर पर टास्क देकर एसटीएफ चीफ बनाया है। एसटीएफ के आला अधिकारी के मुताबिक इंदरजीत के केस की रोजाना एसटीएफ के आला अधिकारियों की मीटिंग हो रही है। केस के हर पहलू पर एडीजीपी हरप्रीत सिद्धू खुद नजर रख रहे हैं, ताकि अगर इसमें कोई अन्य अधिकारी या तस्कर का नाम आए तो उसको किसी सूरत में बख्शा न जा सके।