चंडीगढ़ में डीसी ऑफिस पर पदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाईं। लोगों ने भी पथराव किए। बच्चे, बूढ़े और महिलाओं पर भी टूटा पुलिस का कहर। दरअसल धनास की कच्ची कॉलोनी के लोग सोमवार को डीसी आफिस इस उम्मीद के साथ पहुंचे थे कि अफसरों से गुहार लगाकर किसी तरह अपना घर बचा लिया जाए।
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देखिए, महिलाओं पर पुलिसिया बर्बरता की मुंह बोलती तस्वीरें
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अफसरों ने गुहार तो सुनी नहीं, लेकिन पुलिस ने लाठियां, पत्थर और आंसू गैस के गोले छोड़कर 20 से ज्यादा लोगों को घायल जरूर कर दिया। जवाब में भीड़ ने पथराव किया तो तो पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। क्या बच्चे, क्या बूढ़े और महिलाएं, सभी पर पुलिस का कहर बरपा। भगदड़ और पुलिस की मार से एक बच्ची की हालत नाजुक बनी है।
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कच्ची कॉलोनी में अवैध तौर पर बसी दो हजार से अधिक झुग्गियों को हटाने के लिए प्रशासन ने 30 जून तक का समय दिया था। शनिवार को एनाउंसमेंट भी कर दी गई थी। पीला पंजा चलाए जाने की घोषणा के विरोध में सीपीआई एमएल के नेताओं के प्रतिनिधित्व में सोमवार को कॉलोनी वासी बच्चों के साथ सुबह 10 बजे डीसी ऑफिस पहुंच गए।
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सीपीआई एमएल के सचिव कंवलजीत सिंह और उनकी टीम पूरे प्रदर्शन को लीड कर रही थी। पार्किंग में जमे प्रदर्शनकारियों ने डीसी ऑफिस जाने का रास्ता रोक दिया और प्रतिनिधिमंडल को डीसी से बातचीत के लिए बुलाए जाने के आश्वासन के बाद रास्ता खोल दिया। डीसी से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत के लिए अंदर नहीं बुलाए जाने का प्रदर्शनकारियों को मैसेज भेजा।
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इसके बाद भीड़ ने नारेबाजी करते हुए डीसी ऑफिस के अंदर घुसने की कोशिश शुरू कर दी। सीपीआई नेता डा. नवरीत के साथ पुलिस की खींचतान और भीड़ द्वारा पुलिस पर झंडे वाले डंडे फेंकने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया।
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पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को डीसी ऑफिस से तितर-बितर करने के बाद प्लाजा में भी खदेड़-खदेड़कर पीटा। विरोध में प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया तो जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी पत्थर फेंके। इस दौरान कई आम लोगों ने इधर-उधर छुपकर जान बचाई।
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कॉलोनी वासी कांति देवी ने बताया कि उन्हें पहले नोटिस दिया जाना चाहिए था। शनिवार को केवल एनाउंसमेंट की गई। वह जिस घर में रहती है, उसका बाकायदा प्रतिमाह 600 रुपये किराया देती है। जमींदार ने कॉलोनी को अप्रूव करवाने का आश्वासन भी दिया था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
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वहीं, वीणा ने बताया कि पुलिस ने डंडों से उनकी टांग पर कई वार किए। हालत यह है कि वह एक कदम भी नहीं चल सकती। पुलिस ने प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोगों के मोबाइल को डीसी ऑफिस के वेटिंग रूम में ही कब्जे में ले लिया। जितनी देर बाहर लाठीचार्ज की कार्रवाई चली, सभी को नीचे बिठाए रखा। बाद में वहीं उनके बयान दर्ज किए।
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प्रदर्शनकारी डा. नवरीत, निशा और कई अन्य लोगों को पुलिस ने एस्टेट ऑफिस के संपर्क सेंटर में बंद कर दिया। प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के बाद सभी को बस में भरकर वहां से ले जाया गया।
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कुलजीत सिंह, सरपंच, धनास ने बताया कि जिस जमीन पर कॉलोनी बसी है, वह जमींदारों की है। सबके पास जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े हैं, इसलिए यहां खेती भी नहीं की जा सकती है। तभी यहां झुग्गियां डलवा दी गईं। किराए लेने के अलावा कई बार कार्रवाई से बचाने के नाम पर भी पैसे लेने की मेरे पास शिकायतें आती रही हैं। यहां रहने वाले लोग पहले ही पीड़ित हैं। ऐसे में इन पर लाठीचार्ज करना गलत है। कुछ लोग राजनीति चमकाने में जुटे हैं। इसलिए कॉलोनी वालों को भी पुलिस की मार झेलनी पड़ी।