मां-बाप को अपने सपने के बारे में बताया तो उन्होंने कहा उड़ान भरो, बस फिर क्या था वो पंख फैलाकर छू लिया आसमां...पर एक अनहोनी और सब कुछ खत्म।
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पैनी चौधरी
हम बात कर रहे हैं देश की बहादुर बेटी और इंडियन नेवी की को-पायलट पैनी चौधरी की, जिन्होंने 17 दिन कोमा में रहने के बाद दम तोड़ दिया। मां-बाप इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। जब से बेटी की मौत की खबर करनाल स्थित उनके घर पहुंची है, कोहराम मचा हुआ है। मां को होश ही नहीं है, पिता भी बदहवासी की हालत में हैं। किसी को भी इस अनहोनी पर यकीं नहीं हो रहा।
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पैनी चौधरी
बता दें कि 10 मार्च को रायगढ़ जिले के पास इंडियन कोस्ट गार्ड का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हेलीकॉप्टर चार यात्रियों के साथ एक नियमित राउंड पर था, जिसमें डिप्टी कमांडेंट बलविंदर सिंह, सहायक कमांडेंट पैनी चौधरी और दो गोताखोर संदीप और बलजीत शामिल थे। दुर्घटना के बाद पैनी जैसे ही हेलीकॉप्टर से उतरने लगी, हेलीकॉप्टर का रोटर ब्लेड पैनी के हेलमेट पर जा टकराया।
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पैनी चौधरी
टक्कर लगने से वो बुरी तरह घायल हो गई। रोटर लगने से पैनी चौधरी को सिर में अंदरुनी चोट लगी। पैनी को तुरंत दक्षिण मुंबई के कुलाबा क्षेत्र स्थित नौ सैनिक अस्पताल आईएनएचएस अश्विनी में भर्ती कराया गया। यहां उनके सिर की सर्जरी की गई, लेकिन वे कोमा में चली गईं। पिछले 17 दिन वे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थीं, लेकिन होश नहीं आया और 27 मार्च को उन्होंने दम तोड़ दिया।
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पैनी चौधरी
बताया जा रहा है कि राउंड के दौरान हेलीकाप्टर इंजन बंद हो गया था, तो पायलट और सह-पायलट ने समुद्र में गिरने से रोकने के लिए हेलिकॉप्टर को घुमाने की सोची। घुमाने के लिए रोटर के मूवमेंट का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने हेलीकॉप्टर को समुद्र तट के रेतीले हिस्से पर उतारने की कोशिश की, लेकिन यह नहीं हो सका और हेलीकॉप्टर एक चट्टानी पैच पर उतरा और दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
पैनी चौधरी करनाल स्थित नूरमहल व ज्वेल्स होटल्स के मालिक व सेवानिवृत कर्नल मनबीर चौधरी की भतीजी हैं। कर्नल मनबीर चौधरी के चाचा भी 1962 की भारत चीन लड़ाई में देश के लिए वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं। अब उनकी 26 वर्षीय बेटी पैनी चौधरी भी ड्यूटी के दौरान हादसे का शिकार हो गईं। पैनी के परिजनों ने उसे शहीद का दर्जा देने की मांग की है।