पिता को अचानक पैरालाइसिस का अटैक हुआ। बेटा इलाज को पैसे निकलवाने पहुंचा तो बैंक कर्मियों का जवाब सुनकर सन्न रह गया।
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पैसा निकलवाने के लिए बैंक के बाहर लगी लंबी लाइन
बैंक अधिकारियों ने उन्हें यह कह कर वापस भेज दिया कि चेक पर उनके पिता के साइन नहीं हैं। पिता के साइन करवाकर लाओ, तब दो हजार रुपये मिलेंगे। गोविंदपुरा में किराने की दुकान चलाने वाले हरिचंद को दो दिन पहले पैरालाइसिस का अटैक हुआ था। उन्हें उपचार के लिए पीजीआई में भर्ती कराया गया। वहां वे ब्रेन हैमरेज के शिकार हो गए। हरिचंद के बेटे हैप्पी ने बताया कि बैंक अधिकारियों को बताया गया कि उनके पिता को ब्रेन हैमरेज हुआ है।
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- फोटो : अमर उजाला
पीजीआई की रिपोर्ट भी दिखाई गई, लेकिन बैंक अधिकारियों ने उन्हें यह कह कर वापस भेज दिया कि चेक पर उनके पिता के साइन नहीं हैं। पिता के साइन करवाकर लाओ, तब दो हजार रुपये मिलेंगे। हरिचंद के परिजनों को बैंक से रुपये न मिले तो उन्होंने 100 नंबर पर कॉल कर पुलिस बुला ली, लेकिन पुलिस अधिकारी भी उनकी सहायता नहीं कर पाए। बैंक से रुपये न मिलने पर मनीमाजरा के गोविंदपुरा के एक व्यक्ति को इलाकावासियों ने पैसे इकट्ठा कर उसके पिता का इलाज कराने में मदद की।
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बैंक
केंद्र के आदेशों का उल्लंघन करने में भी बैंक गुरेज नहीं कर रहे। कुछ ऐसा ही वाकया इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी के साथ हुआ। बीमार पत्नी के कीमोथिरेपी कराने के लिए पैसे निकालने गए अफसर को बैंक कर्मियों ने 24 हजार के चेक पर मात्र दो हजार रुपये दिए। मौली गांव निवासी रिटायर्ड अधिकारी गुरचरण ने बताया कि उनकी पत्नी सीमा देवी ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं। उनकी तबीयत वीरवार को अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उनको सेक्टर-6 पंचकूला के अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इसी के चलते डॉक्टरों ने कीमोथिरेपी के लिए दवाइयां लाने को कहा। दवाइयों की कीमत काफी अधिक थी, लिहाजा उन्होंने मौलीजागरां स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक में संपर्क किया। यहां पर उनका खाता है। उन्होंने बैंक से 20 हजार रुपये निकालने के लिए चेक दिया। लेकिन बैंक कर्मचारियों ने उनको यह कह कर 2 हजार रुपये दिए कि बैंक में पैसे नहीं हैं। गुरचरण ने कहा कि पत्नी की तबीयत खराब है। अपने रुपये न मिलने के चलते वह उपचार भी नहीं करवा पा रहे हैं।