देश का वो जाबांज बाक्सर जो कभी मुहम्मद अली से लड़ा था, आज मौत से लड़ रहा है लेकिन कोई पूछने वाला नहीं है।
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Kaur Singh and Boxing legend Muhammad Ali
- फोटो : File Photo
जी हां, मुहम्मद अली से रिंग में लड़ने वाले पद्मश्री और अर्जुन अवार्डी बॉक्सर कौर सिंह की तबीयत फिर खराब हो गई है। वह मोहाली के एक नामी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हैं। बीमार बॉक्सर ने देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस समय रोशन किया, जब कोई सोच भी नहीं सकता था। कौर सिंह की ख्याति का अंदाजा उनके द्वारा हासिल किए गए मेडलों से लगाया जा सकता है।
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सेक्टर-69 स्थित अस्पताल में भर्ती कौर सिंह ने बताया कि उनकी तबीयत लंबे समय से खराब चल रही है। बीते दो साल से उनकी हालत ज्यादा खराब है। हर दूसरे महीने उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सेना से उन्हें पेंशन तो मिलती है और इलाज का खर्च भी सेना ही उठा रही है। लेकिन घर-परिवार के चक्कर में पेंशन भी खत्म हो जाती है। इसके अलावा जब अस्पताल में भर्ती होते हैं तो खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में उन्हें पहले कर्ज लेना पड़ा था। घर की हालत काफी खराब है।
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उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे हैं। वह भी ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं। अब उनका भी परिवार है। ऐसे में उनके भी अपने खर्च बढ़ गए हैं। उनकी दो एकड़ जमीन है। पंजाब सरकार ने दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी थी। उन्होंने बताया कि वह इलाज के लिए भी अकेले आए हैं। क्योंकि अगर पारिवारिक मेंबर साथ आते तो यहां पर रहने व खाने-पीने के खर्च बढ़ जाते। इस कारण वह अकेले अस्पताल आए हैं।
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जिक्रयोग है कि इससे पहले दिसंबर-2017 में भी गंभीर हालत में मोहाली में भर्ती कराए गए थे। इस दौरान करीब वह 25 दिन अस्पताल में रहे थे। विधायक हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि कौर सिंह नेशनल बॉक्सर के साथ पद्मश्री अवार्डी है। इसलिए सरकार से मांग करता हूं कि उनका इलाज किसी बड़े अस्पताल में कराया जाए। दिल्ली या हैदराबाद के किसी बड़े अस्पताल में उनको ले जाया जाए। खेल मंत्रालय भी उनकी सुध ले। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार को पत्र लिखेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के खेल मंत्री को उनकी सुध लेनी चाहिए। साथ ही उन्हें अस्पताल में आकर सम्मानित करना चाहिए।
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चाचा से 13 रुपये उधार लेकर फौज में भर्ती हुआ
करीब पौने सात फुट के कद वाले कौर सिंह ने बताया कि उनके चाचा महिंदर सिंह नेे 1971 में फौज में भर्ती होने की सलाह दी। पटियाला में भर्ती में शामिल होने के लिए उनके पास किराया भी नहीं था। कौर सिंह ने बताया कि वह अपने चाचा से 13 रुपये मांगकर भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने गए। चाचा के 13 रुपये से उनकी जिंदगी बनी, जिसे वह कभी नहीं भूल सकते।
1971 की जंग में भी दिखा चुके हैं पराक्रम
अस्पताल में भर्ती कौर सिंह ने बताया कि उन्होंने सेना में भी पराक्रम दिखाया था। वह 1971 में फौज में भर्ती हुए थे। राजस्थान के अहमदाबाद सेक्टर में लड़ाई का मैदान संभाला और जीत प्राप्त की। फौज में बहादुरी से लड़ाई लड़ने के कारण उनको संग्राम मेडल और वेस्ट स्टार अवार्ड से सम्मानित किया गया।