सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सरहद पर तनाव है। लेकिन बार्डर के पास रहने वाले बुजुर्ग अब आर-पार की लड़ाई चाहते हैं।
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सरहदी गांवों के लोग दुश्मनों को सबक सिखाने को तैयार
- फोटो : अमर उजाला
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद एक तरफ जहां बुजुर्गों का तर्क है कि उन्होंने कई लड़ाइयां देखी हैं अब किसी भी तरह का डर नहीं लगता, वहीं युवाओं के बाजू भी फड़क रहे हैं। लोगों का मानना है कि यदि इस बार लड़ाई हुई तो वह आर पार की होगी।
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सरहदी गांवों के लोग दुश्मनों को सबक सिखाने को तैयार
- फोटो : अमर उजाला
भारत-पाक के बीच बढ़ रहे तनाव के बावजूद गांवों के लोग वहीं पर डटे हुए हैं। उन्होंने अपने बच्चों और महिलाओं को रिश्तेदारों के पास भेज दिया था लेकिन वह बेखौफ अपनी खेती व रोजमर्रा का काम निपटा रहे हैं।
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सरहदी गांवों के लोग दुश्मनों को सबक सिखाने को तैयार
- फोटो : अमर उजाला
गांव राजा राय के अस्सी वर्षीय बुजुर्ग मोहन सिंह ने 1947 में बंटवारे का दर्द भी झेला है। उसके बाद 1965, 1971 के भारत और पाक के बीच युद्ध का दर्द झेला है। 1965 में वह परिवार को लेकर एक माह के लिए और 1971 में दो साल के लिए घर बार छोड़ कर चले गए थे।
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बॉर्डर से सटे गांवों के लोग
उनका तर्क है कि 1947 में डंडों और देसी हथियारों से लड़ाई होती थी लेकिन अब एक हजार किमी से अधिक की मार करने वाले परमाणु बम आ गए हैं। ऐसे में कहां तक दौड़ लेंगे। मोहन सिंह कहते हैं कि खेती और पशु छोड़ कर जाना अब संभव नहीं है। अब यहीं पर सभी मिल कर दुश्मन का मुकाबला करेंगे।
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Border Security
- फोटो : File Photo
मोहन सिंह बताते हैं कि जब 30 सितंबर को तनाव बढ़ा था उसके बाद पाक की तरफ से कुछ लोग जीरो लाइन तक आकर नारेबाजी कर गए थे लेकिन उसके बाद से सब कुछ शांत है। गांव के बुजुर्ग बख्शीश सिंह ने बताया कि अब लड़ाई से, गोली चलने से कोई डर नहीं लगता।
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बॉर्डर से सटे गांव में दीवार की तरह डटे तीन बुजुर्ग
- फोटो : अमर उजाला
गांव के कुछ परिवार ही अपने रिश्तेदारों के पास गए हैं। 1999 और 2002 में जब सरहद पर तनाव बना था, ऐसी स्थिति आज नहीं है। बावजूद इसके सतर्कता बरती जा रही है। सरहद के साथ लगी कंटीली तार के नजदीक एसएमजी गन लेकर गश्त कर रहे बीएसएफ जवान ने बताया कि यहां से थोड़ी ही दूर पाक की सीमा खालिजवाड़ा पोस्ट है।
यहां पर पाक की 87 रेंजर बटालियन तैनात है। उनका कंपनी कमांडर मोहम्मद खालिद है। यहां पर पाक सेना की काफी मूवमेंट देखी गई है। गांव राजा मोहतम के ग्रामीण तरसेम सिंह ने बताया कि सतलुज दरिया पार पाकिस्तान का गंजा गांव हैं। इसके साथ ही भारत की खेती वाली जमीन है। बुधवार को फेंसिंग पर लगे गेट खुलने के कारण किसान खेती करने को वहां जा रहे हैं।