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बार्डर पर बसे लोगों का एलान, अब युद्ध मंजूर, घर नहीं छोड़ेंगे

Sun, 09 Oct 2016 09:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर(अनिल कुमार)
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बार्डर पर बसे लोगों का एलान - फोटो : अमर उजाला
बार्डर पर बसे लोगों ने एलान कर दिया है कि अब भले ही युद्ध हो जाए, वो मंजूर है लेकिन घर नहीं छोड़ेंगे।
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पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बॉर्डर से सटे गांवों के हाल
सीमांत गांव में लोगों की वापसी के कारण रौनक तो लौट आई, लेकिन अधिकांश ग्रामीण आढ़ती व दुकानदारों के करजाई हो गए। ग्रामीणों ने वाहनों पर सामान लादकर सुरक्षित जगह ले जाने के लिए आढ़तियों से कर्ज लिया था। 
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बार्डर से सटे गांव में काम करती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
गांव में रहने वाले गरीब परिवार भी तकरीबन 15 से 20 हजार रुपये के करजाई हो गए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि पंजाब सरकार उन्हें मुआवजा दे जिन लोगों को घर से बेघर किया था। 

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पंजाब में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद हाईअलर्ट, लोगों की मुश्किलें बढ़ीं
सरहद से कुछ ही दूरी स्थित गांव गट्टी राजोके के सरपंच मक्खन सिंह ने बताया कि गांव में लगभग सभी परिवार लौट आए हैं, लेकिन ग्रामीणों का बहुत नुकसान हुआ है।
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बॉर्डर पर एरिया में फसल काटते हुए लोग
अधिकतर ग्रामीण आढ़ती व दुकानदारों से उधार पैसे लेकर वाहनों पर सामान लाद कर सुरक्षित जगहों व रिश्तेदारों के पास गए थे। सभी परिवार पंद्रह से बीस हजार रुपये के कर्ज में आ गए हैं। 
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बॉर्डर से सटे गांवों के लोग
मक्खन सिंह ने बताया कि सीमांत गांव टिंडी वाला, गट्टी राजोके, भखड़ा व झुग्गे हजारा सिंह वाला दरिया पार सरहद से सटे हैं। इन गांव को सरकार ने कोई सुविधा प्रदान नहीं की है। तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की सरकार गांव के प्रत्येक परिवार को प्रतिमाह पंद्रह सौ रुपये देती थी अब वह भी बंद हो गए हैं। 
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इंडो पाक बॉर्डर पर हाईअलर्ट के चलते लोगों ने छोड़ा गांव - फोटो : अमर उजाला
मक्खन सिंह ने बताया कि भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 के युद्ध में इस गांवों के लोग 22 महीने सुरक्षित जगहों पर रहे थे। जब गांव लौटे तो केंद्र सरकार ने प्रत्येक परिवार को प्रतिमाह दो हजार रुपये दिए थे। मकानों के निर्माण के लिए धनराशि भी दी थी, लेकिन अब सरकार उनकी सुध नहीं लेती है।

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border - फोटो : PTI
ग्रामीण बलबीर सिंह, महिंदर सिंह ने बताया कि सरहद पर तनाव की स्थिति कह कर उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई, वो कर्ज तले दब गए। कई ग्रामीणों का वाहनों पर सामान लादते समय टूट गया। 
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बार्डर के गांवों में लौटने लगे लोग - फोटो : File Pic
महिला कौशल्या देवी, बानो बाई का कहना है कि उन्हें अपने घर आकर अच्छा लग रहा है। अब सरहद पर भारत-पाक युद्ध क्यों न हो जाए वो अपना घर छोड़कर कहीं नहीं जाएंगी। 29 सितंबर से लेकर 7 अक्तूबर तक तमाम परेशानियां झेलनी पड़ी हैं।
 
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