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एक बिग्रेडियर, जिसने ढेर किए थे 2000 जवान, पाकिस्तानी टैंक पर किया था भंगड़ा, 10 अनकही बातें

Sun, 18 Nov 2018 08:58 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह
90 सैनिकों के साथ मिलकर पाकिस्तान के 2000 जवान मार गिराए थे और फिर दुश्मन के टैंक पर चढ़कर भंगड़ा किया था। जानिए, उस बहादुर बिग्रेडियर के बारे में 10 अनकही बातें।
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ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह
हम बात कर रहे हैं, बॉर्डर मूवी के असली हीरो बिग्रेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी की, जिनका शनिवार को निधन हो गया। मोहाली स्थित फोर्टिस अस्पताल में शनिवार सुबह उन्होंने आखिरी सांस ली। 77 साल के कुलदीप सिंह पिछले कई दिनों से कैंसर से पीड़ित थे। 1997 में आई जेपी दत्ता की बॉर्डर फिल्म इन्हीं पर बनी है और इसमें इनके किरदार को सनी देओल ने निभाया है।
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ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह
1971 में हुए भारत-पाक युद्ध में (लोंगेवाला चेकपोस्ट पर) सेक्टर 33 चंडीगढ़ के रहने वाले ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी ने एक अहम भूमिका निभाई थी। उस युद्ध में कुलदीप सिंह मेजर थे। और बाद में वह ब्रिगेडियर के पद तक गए और रिटायर होने के बाद चंड़ीगढ़ में रहने लगे थे। लौंगेवाला की लड़ाई के बारे में जो लोग जानते हैं, वह आज भी ब्रिगेडियर चांदपुरी को हीरो मानते हैं।

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ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह
लौंगेवाला की लड़ाई में कुलदीप सिंह ने भारतीय सेना का बहादुरी और सूझबूझ के साथ नेतृत्व किया था, जिसके लिए उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। कुलदीप सिंह का जन्म गुर्जर परिवार में अविभाजित भारत के पंजाब क्षेत्र में मांटगोमेरी में 22 नवंबर 1940 को हुआ था। उसके बाद उनका परिवार उनके पैतृक गांव चांदपुर रुरकी चला आया, जो बलचौर में है।
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ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह एनसीसी के सक्रिय सदस्य थे। कुलदीप सिंह ने 1962 में जब होशियारपुर गवर्नमेंट कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की, तब एनसीसी की परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी। कुलदीप सिंह भारतीय सेना में सेवा देने वाले अपने परिवार के तीसरी पीढ़ी के सैन्य अधिकारी थे। उनके दोनों चाचा भारतीय वायुसेना में पायलट ऑफिसर थे। कुलदीप सिंह अपने माता-पिता की अकेली सन्तान थे।
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ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह सन् 1962 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उन्होने ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई से कमीशन प्राप्त किया और पंजाब रेजिमेन्ट की 23वीं बटालियन में शामिल हुए। उन्होंने 1965 के युद्ध में भाग लिया, जहां वे पश्चिमी सेक्टर में तैनात थे। युद्ध के बाद, एक साल के लिए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन बल को अपनी सेवाएं दी और गाजा (मिस्र) में कार्यरत रहे।
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ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह
1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में लौंगेवाला पोस्ट पर ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी ने अपने 90 सैनिकों के साथ पाकिस्तान के 2000 सैनिकों का मुकाबला किया और उन्हें ढेर कर दिया। उस समय मेजर चांदपुरी पंजाब रेजीमेंट की 23वीं बटालियन को लीड कर रहे थे। मेजर चांदपुरी के पास सिर्फ 90 लोगों का दल था और सामने थी पाकिस्तान की 51वीं इंफ्रेंटी ब्रिगेड के 2,000 से 3,000 सैनिक, जिसके साथ 22वीं आर्म्ड रेजीमेंट भी थी।

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ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह
5 दिसंबर 1971 को जब वे भारतीय सीमा पर गश्त कर रहे थे, तो दुश्मन देश पाकिस्तान ने हमला कर दिया। हालात मुश्किल थे और चांदपुरी के पास जवान कम। फिर भी वे जवानों को उत्साहित करते रहे। पूरी रात उन्होंने 90 लोगों की कंपनी के साथ दुश्मनों का मुकाबला किया। नतीजा, पाकिस्तान के हजारों सैनिक ढेर हो गए और दुश्मन चांदपुरी के जवानों को छू भी नहीं पाए थे। भारत के सिर्फ दो जवान घायल हुए थे।

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ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह
एक इंटरव्यू के दौरान चांदपुरी ने उस लड़ाई का जिक्र करते हुए कहा था कि मैं ठहरा पंजाबी का बेटा मैं कहां पीछे हटने वाला था। हम बिना किसी डर के दुश्मन सेना पर टूट पड़े। हमारे सैनिकों के इरादे मजबूत थे, रात होते-होते तक हमारी छोटी सी टुकड़ी ने पाकिस्तान के 12 टैंक तबाह कर दिए थे। ‘जो बोले सो निहाल, सतश्री अकाल’ की आवाजें गूंज रही थीं। रात भर गोलीबारी जारी रही और हमने पाकिस्तानियों को 8 किलोमीटर तक खदेड़ दिया।
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ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह
पाकिस्तानी सेना के इरादे के मुताबिक, वे लौंगोवाल चेकपोस्ट पर कब्जा कर रामगढ़ से होते हुए जैसलमेर तक जाना चाहते थे। थार के रेगिस्तान में जैसलमेर की लौंगेवाल चौकी पर मिली हार को पाकिस्तानी सेना शायद ही कभी भुला पाएगी। इस चौकी पर कब्जा जमाने के प्रयास में दो दिन में पाकिस्तान सेना को अपने टैंकों, वाहनों और जवानों से हाथ धोना पड़ा। इसके बावजूद चौकी पर कब्जा नहीं हो सका।

 
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