अपने राजनीति सफर में विनोद खन्ना ने ऐसा काम किया है जिसे कई गावों के लाखों लोग कभी भूल नहीं पाएंगे। देखिए
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vinod khanna
लोकसभा हलका गुरदासपुर से सांसद और मशहूर फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना नहीं रहे, लेकिन बतौर जनप्रतिनिधि उन्होंने अपने जीवन की दूसरी भूमिका बखूबी निभाई। वे जितने सफल अभिनेता थे, उतने ही कामयाब नेता साबित हुए। अपने कार्यों से लोकप्रियता हासिल करने वाला ये शख्स भले ही दुनिया को छोड़ गया हो, लेकिन क्षेत्र को लाइफ लाइन दे गया।
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vinod khanna
पाक सीमा से सटे 50 गांवों के लिए पुल बना वरदान
जिले के सबसे पिछड़े सीमावर्ती क्षेत्र के लोग सांसद विनोद खन्ना की सराहना करते नहीं थकते। इंडो-पाक बॉर्डर के करीब 50 गांवों की सुविधा के लिए विनोद खन्ना ने ही साल 2001-2002 में सांसद रहते रावी दरिया पर कथलौर पुल का निर्माण करवाया था। पुल बनने से इन गांवों का जिला हेडक्वार्टर से जुड़ाव बेहद आसान हो गया।
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vinod khanna in himachal
इससे पहले यह गांव दरिया में पलटून पुल के सहारे आते-जाते थे, लेकिन ऐसा पुल बरसात में डूब जाता था। इसके बाद नाव के सहारे लोगों को आना जाना पड़ता था, लेकिन सांसद खन्ना के प्रयासों से बना पुल गांव वालों के लिए वरदान साबित हुआ। कथलौर पुल समेत विनोद खन्ना ने लोस हलका गुरदासपुर में तीन बड़े पुलों का निर्माण करवाया। इनमें मुकेरियां पुल व उज्ज दरिया पुल भी शामिल हैं।
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विनोद खन्ना
- फोटो : SELF
पठानकोट से था खास लगाव
खास लगाव के कारण सिर्फ विनोद खन्ना ने पठानकोट में ही घर बनाया। उन्होंने शहर को एयरपोर्ट समेत कई अहम सौगातें दीं। शहर के सैली रोड पर विनोद खन्ना का घर है। पठानकोट दौरे के दौरान वह यहीं ठहरते थे। सांसद खन्ना ने पठानकोट कैंट रेलवे स्टेशन के एरिया का विस्तार, पठानकोट-अमृतसर रोड को फोरलेन व एयरपोर्ट सेवा पठानकोट को दिलवाने जैसे बड़े काम किये। सांसद खन्ना ने गांव पंडोरी को भी गोद लिया हुआ था।
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अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना
जनसेवा के प्रति था समर्पण भाव
छह अक्टूबर 1946 को जन्मे विनोद खन्ना ने साल 1997 में राजनीतिक सफर शुरू किया था। इसी सफर के दौरान उनके साथी बने समरेंद्र शर्मा बताते हैं कि खन्ना राजनीति में होने के बावजूद अध्यात्म से भी जुड़े थे। समरेंद्र शर्मा विनोद खन्ना के राजनीतिक सलाहकार रहे हैं। वे बताते हैं कि जनसेवा का जज्बा खन्ना में ऐसा था कि एक बार तो वे अपने लोस चुनाव की जीत की खुशी को छोडक़र जरूरतमंद की मदद के लिए चल पड़े थे। बात साल 2014 की है।
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अपने बेटे राहुल के साथ विनोद खन्ना
जिस दिन चुनाव में जीत मिली वे फूल-मालाओं से लदे और खुशी में झूमते वर्करों से घिरे थे। तभी गांव पनियाड़ के पास से गुजरते समय वहां एक सडक़ हादसा हो गया। हादसे में स्कूटर सवार एक दंपति घायल हो गया। खन्ना ने अपनी जीत की खुशी को छोड़ा और घायलों को अपनी गाड़ी में लेकर अस्पताल पहुंचे। वर्करों ने उन्हें रोकने की कोशिश करते हुए कहा कि घायलों को वह (वर्कर) अस्पताल में पहुंचा देंगे। लेकिन खन्ना ने किसी की नहीं सुनी।
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विनोद खन्ना
खन्ना ने 1997 से शुरू किया था राजनीतिक सफर
साल 1997 में विनोद खन्ना ने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की थी। इसके बाद अगले ही साल 1998 में भाजपा की ओर से उन्होंने लोकसभा हलका गुरदासपुर से चुनाव जीता। 1999 में दोबारा हुए चुनाव में उन्होंने फिर से इसी हलके से जीत दर्ज की। 2002 में उन्हें कल्चर एंड टूरिज्म मंत्री बनाया गया था।
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विनोद खन्ना
छह महीने मंत्रालय संभालने के बाद उन्हें एक्सटर्नल अफेयर मंत्रालय का जिम्मा सौंप गया था। इसके बाद साल 2004 में फिर से चुनाव जीतकर वह सांसद बने। हालांकि साल 2009 में वह हार गये। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें गुरदासपुर से ही एक बार फिर विजयश्री हासिल हुई।
गुरदासपुर में बेदाग रही सांसद विनोद खन्ना की छवि
सांसद विनोद खन्ना के निधन पर भारतीय जनता पार्टी (गुरदासपुर) के जिलाध्यक्ष समेत कई नेताओं ने उनकी मृत्यु पर दुख जाहिर किया है। नेताओं ने कहा कि सासंद विनोद खन्ना ने गुरदासपुर में करीब 20 साल तक राजनीतिक जीवन बिताया। वे अपने लंबे राजनीतिक जीवन में बिल्कुल बेदाग रहे। उन पर किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा।