हंसराज हंस।
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हंसराज हंस के काफिले को जब संगठनों ने घेर लिया तो मजबूरन उन्हें किसानों के बीच आना पड़ा। करीब 15 मिनट तक सांसद किसानों के बीच हाथ जोड़कर उन्हें समझाने को कोशिश करते रहे। किसानों ने उनकी एक न सुनते हुए जमकर खरी-खोटी सुनाई। किसानों ने उनसे कहा कि या तो वह अपने पद से इस्तीफा दें, नहीं तो उनके साथ धरने में आकर बैठे और किसान यूनियन का झंडा उठाएं।