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#HappyBaisakhi: मुक गई फसलां दी राखी जट्टा आई बैसाखी, पढ़िए हम क्यों मनाते हैं ये पर्व?

Thu, 13 Apr 2017 10:47 AM IST
टीम डिजीटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बैसाखी स्पेशल - फोटो : अमर उजाला
बैसाखी नाम बैशाख से बना है। अकेले पंजाब या हरियाणा में ही नहीं, पूरे देश में बैसाखी पर्व अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। देखिए, पर्व से जुड़ी सभी बड़ी जानकारियां।
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Vaisakhi Special - फोटो : अमर उजाला
केरल में यह त्योहार 'विशु' कहलाता है। बंगाल में इसे नभ बर्श, असम में इसे रोंगाली बिहू, तमिलनाडू में पुथंडू और बिहार में इसे वैषाख के नाम से पुकारा जाता है। देखिए, पर्व से जुड़ी सभी बड़ी जानकारियां।
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Vaisakhi Special
उत्तर भारत में बैसाखी फसल पकने की खुशी का प्रतीक है। किसान सर्दियों की फसल काट लेने के बाद नए साल की खुशियां मनाते हैं। ढोल-नगाड़ों की थाप पर युवक-युवतियां प्रकृति के इस उत्सव का स्वागत करते हुए गीत गाते हैं और एक-दूसरे को बधाइयां देकर अपनी खुशी का इजहार करते हैं और झूम-झूमकर नाच उठते हैं।

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जटाशंकर गुरुद्वारा में कार्यक्रम के दौरान शबद कीर्तन करते - फोटो : amar ujala
सिखों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह ने बैसाखी के दिन ही आनंदपुर साहिब में वर्ष 1699 में खालसा पंथ की नींव रखी थी। इसका 'खालसा' खालिस शब्द से बना है। इस दिन पंजाब का परंपरागत नृत्य भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है। पूरे देश में श्रद्धालु गुरुद्वारों में अरदास के लिए इकट्ठे होते हैं। मुख्य समारोह आनंदपुर साहिब में होता है।
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Baisakhi - फोटो : Amar Ujala
इतिहास में बैसाखी पर्व का एक अपना विशेष महत्व है। सिखों के दूसरे गुरु श्री अंगद देव जी का जन्म इसी माह में हुआ था। पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृ्ष्टि की रचना इसी दिन की थी। महाराजा विक्रमादित्य के द्वारा श्री विक्रमी संवत का शुभारंभ इसी दिन से हुआ था। भगवान श्री राम का राज्याभिषेक इसी दिन हुआ था, इसलिए इसे पर्वों का महापर्व भी कहते हैं।
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Baisakhi - फोटो : Amar Ujala
भारत में महीनों के नाम नक्षत्रों पर रखे गए हैं। बैसाखी के समय आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है। विशाखा युवा पूर्णिमा में होने के कारण इस माह को बैसाखी कहते हैं। इस प्रकार वैशाख मास के प्रथम दिन को बैसाखी कहा गया और पर्व के रूप में स्वीकार किया गया। बैसाखी के दिन ही सूर्य मेष राशि में संक्रमण करता है अतः इसे मेष संक्रांति भी कहते हैं।
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- फोटो : फाइल फोटो
बैसाखी के पर्व को मौसम के बदलाव का पर्व भी माना जाता है। ये पर्व जब आता है उस समय सर्दियों की समाप्ति और गर्मियों का आरंभ होता है। इसी के आधार स्वरुप लोक परंपरा धर्म और प्रकृति के परिवर्तन से जुड़ा यह समय बैसाखी पर्व की महत्ता को दर्शता है। इस दर्शन के साथ नए वर्ष में सुख समृद्धि की कामना की जाती है।

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वैसाखी मनाते हुए महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
पंजाब के लिए इस पर्व के खास मायने हैं। वहां आज भी अधिकतर लोग कृषि पर निर्भर हैं। अपने खेतों में तैयार फसल को देख किसान अपने उमंग और उत्साह को रोक नहीं पाते और झूमने पर मजबूर हो जाते हैं। इस त्यौहार में पंजाब के लोग लोकसंगीत, लोकगीत, लोकनाट्य प्रस्तुत कर इसे और सुनहरा बना देते हैं।
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बैसाखी स्नान
हिंदुओं के लिए यह त्योहार नववर्ष की शुरूआत है। हिंदु इसे स्नान, भोग लगाकर और पूजा करके मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि हजारों साल पहले देवी गंगा इसी दिन धरती पर उतरी थीं। उन्हीं के सम्मान में हिंदू धर्मावलंबी पारंपरिक पवित्र स्नान के लिए गंगा किनारे एकत्र होते हैं।
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