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अपने पहले गुरुकुल पहुंचे रामदेव, खोला निजी जिंदगी का सीक्रेट

Wed, 20 May 2015 07:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नारनौल
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योग गुरु बाबा रामदेव जब अपने प्रथम गुरुकुल पहुंचे तो यहां उन्होंने बच्चों को अपनी जिंदगी का बेहद निजी सीक्रेट बताया। उन्होंने बताया कि मैं रोटी मांग-मांग कर खाता था। तस्वीरों में पूरा मामला। रिपोर्टः देवेंद्र यादव, नारनौल
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बाबा रामदेव अपने प्रथम गुरुकुल आर्ष गुरुकुल खानपुर पहुंचकर भावविभोर हो गए। बचपन के दिनों को याद करते हुए बाबा रामदेव बोले ‘अरे आज भी कोई मेरे लिए रोटी लाए हो के’। बाबा की यह बात सुन लोग हंसने लगे। दरअसल बाबा रामदेव जब यहां शिक्षा ग्रहण करते थे तो गांव की महिलाएं यहां पढ़ने वाले बच्चों को लाकर रोटियां खिलाती थी। कई बार गुरुकुल के बच्चे गांव से रोटियां मांग कर भी खाते थे। बाबा रामदेव ने भी शिक्षा ग्रहण करने के दौरान यहां पर मांग कर रोटियां खाई हैं।
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योग गुरु बाबा रामदेव आर्ष गुरुकुल खानपुर में यज्ञशाला का उद्घाटन करने पहुंचे। उद्घाटन अवसर पर उन्होंने बचपन की यादों का ही जिक्र किया। जिस पेड़ के नीचे वे शिक्षा ग्रहण करते थे उसकी ओर इशारा करते हुए बाबा बोले इस पेड़ का मुझ पर बड़ा आशीर्वाद रहा है। इसके नीचे बैठकर गुरु से ज्ञान प्राप्त किया है। रामदेव ने कहा कि गुरुकुल की मिट्टी में वो कुश्ती, कबड्डी और कसरत का सिलसिला ही था, जिसने आज तक मुझे निरंतर मेहनत करने का सामर्थ्य दिया है।

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योग गुरु ने बताया कि गुरुकुल की जमीन में वे खेत जोतते समय बैल का प्रयोग नहीं करते थे, बल्कि हाथ से ही हल को खैंचकर खेत जोत दिया करते थे। कई बार तो सभी ब्रह्मचारी मिलकर कस्सी से ही खेत की जुताई कर देते थे। विद्यार्थी काल को याद करके बाबा ने बताया कि इस गांव का उन पर बहुत उपकार है। गांव से खाना एकत्रित करके हम सब एक साथ बैठकर खाना खाते थे। जब भी वे इस धरा पर आते हैं तो यादों का चलचित्र मानों उनकी आंखों के सामने आ जाता है। उन्होंने कहा कि खानपुर हमारे लिए महा तीर्थ है जहां हमें दुखों से उबरने की शक्ति मिलती है। यही उनकी सफलता का छुपा हुआ राज है।
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योग गुरु बाबा रामदेव ने गुरुकुल खानपुर में ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अभी 50 साल और इसी लगन के साथ काम करेंगे। उन्होंने कहा कि वे हमेशा सूर्य की तरह निरंतर समाज सेवा में लगे रहेंगे। जिस प्रकार सूर्य अपनी मर्यादा का अतिक्रमण किए बिना अपना फर्ज निभाता है उसी प्रकार वे भी विश्व कल्याण के लिए अपना जीवन इसी में लगाए रखेंगे।
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बाबा रामदेव ने मजाकिया लहजे में कहा कि जो लोग 60 से ऊपर हो गए हैं वो मेरे अगले 50 साल के कार्य देखने के लिए जिंदा रहना। इस पर 80 वर्षीय एक ग्रामीण ने कहा कि शायद जिंदा तो नहीं रहेंगे, लेकिन आपके काम को देखने के लिए दोबारा यहीं पर जन्म लेंगे। इस बात पर ग्रामीणों में हंसी का फव्वारा फूट पड़ा।
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योग गुरु बाबा रामदेव की जन्म भूमि नारनौल के नांगल चौधरी कस्बे के पास स्थित गांव सैदेअलीपुर है। बाबा रामदेव का बाल्यकाल वहीं पर गुजरा। बाद में उन्होंने घरबार छोड़ दिया था। जिसके बाद उन्होंने गांव खानपुर स्थित आर्ष गुरुकुल खानपुर में गुरुकुल की शिक्षा आचार्य प्रद्युम्न से ग्रहण की थी। आर्ष गुरुकुल खानपुर उनका प्रथम गुरुकुल रहा है। यहां करीब दो साल तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद वे जींद के पास स्थित एक गुरुकुल में चले गए। जहां पर उन्होंने आचार्य बलदेव से शिक्षा ग्रहण की। बाद में उन्होंने पहाड़ों पर भी तप किया तथा हरिद्वार में जाकर वहां आश्रम बनाकर रहने लगे।
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