एशियन गेम्स 2018 में गोल्ड मेडल जीतने वाले 22 साल के बॉक्सर अमित पंघाल यूं ही इस मुकाम तक नहीं पहुंचे। मां ने बेटे के बारे में दो ऐसे राज खोले, सुनकर आप भी भावुक हो जाएंगे।
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अमित पंघाल
रविवार रात 7:45 तक 7688 लाइक, 1772 री-ट्वीट, 181 कमेंट
पदक जीतने के बाद अमित ने एक ट्वीट के माध्यम से उनके पिता व कोच का धर्मेंद्र की फिल्मों के प्रति लगाव को बताया है। अमित ने ट्वीट में लिखा, ‘जकार्ता में स्वर्ण पदक देश को समर्पित.. बधाइयों के लिए सभी का आभार, अगली ही पंक्ति में उन्होंने लिखा, मेरा पहला ट्वीट अपने पिता जी व कोच की दिली ख्वाहिश बताने के लिए। दोनों धर्मेंद्र जी के जबरदस्त फैन हैं। धर्मेंद्र की फिल्म के ब्रेक में भी उनके पिता ने कभी चैनल नहीं बदलने दिया। अगली पंक्ति में उन्होंने लिखा, धर्म जी से मुलाकात हो जाए तो खुशी दोगुनी होगी।’ अमित के इस ट्वीट पर रविवार रात सात बजकर पैंतालिस मिनट तक 7688 लोगों ने पसंद, 1772 लोगों ने री-ट्वीट व 181 लोगों ने कमेंट किया।
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Dharmendra
मुझे भी आपसे मिलके बहुत खुशी होगी: धर्मेंद्र
ट्वीट के जवाब में फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र ने अमित पंघाल को टैग करते हुए उन पर गर्व होने की बात लिखी व अगली ही पंक्ति में उन्होंने लिखा, ‘मुझे भी आपसे मिलके बहुत खुशी होगी। जब भी मुंबईऱ् आओगे, बता दें। बधाई हो, आपको, आपके गुरु और आपके परिवार को। आप हर प्रतियोगिता में जीत हासिल करके देश का नाम रोशन करें, ईऱ्श्वर से यही प्रार्थना करता हूं।’ फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र के इस जवाब को 1884 लोगों ने लाइक, 399 लोगों ने री- ट्वीट किया। अपने ट्वीट पर फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र के ट्वीट का जवाब मिलने के बाद अमित ने उन्हें रिप्लाई करते हुए लिखा, बहुत-बहुत आभार आपका सर.. भारत लौटते ही आपके दर्शन के लिए संपर्क करूंगा।
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बॉक्सर अमित पंघाल
हरियाणा के रोहतक जिले के मैना गांव का यह छोरा भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर तैनात है। पिता विजेंदर सिंह पेशे से किसान हैं। उनके बड़े भाई अजय भी भारतीय सेना में कार्यरत हैं। वहीं मां ऊषा देवी गृहिणी हैं और इन्होंने बेटे को लठ सा गाड़ कै आने को कहा था और वो उन्होंने गाड़ भी दिया। मां उषा देवी ने बताया कि अमित का लक्ष्य ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है। इसके बाद ही वह शादी करेगा। इसलिए बेटे के लिए बहू ढूंढना शुरू नहीं किया है। मां ने बेटे के संघर्ष की कहानी भी भावुकता के साथ सुनाई।
मां ने बताया कि अमित के पिता के पास सिर्फ एक एकड़ जमीन है। परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी, इसलिए बड़े बेटे अजय को बॉक्सिंग छोड़कर नौकरी करनी पड़ी। लेकिन अजय ने अमित की बॉक्सिंग की ट्रेनिंग जारी रखी। वह चाहता था कि मैं इंटरनेशनल बॉक्सर नहीं बन सकता तो क्या अमित बनाकर रहेगा। मां ने बताया कि अमित ने भी बड़े भाई के त्याग को समझा और उनका सपना पूरा करने के लिए ऐसा जुनून दिखाया कि छह महीने बिना ग्लव्स के नंगे हाथों प्रैक्टिस की। क्योंकि नए ग्लव्स खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। बॉक्सर को लड़ने के लिए अच्छी डाइट चाहिए थी, वो डाइट भी अमित को नहीं मिली, पर उसने संघर्ष नहीं छोड़ा।