बहादुर बेटी के जज्बे को सलाम, 11 साल की उम्र से खेल रही है। हर रोज 15 अंडे खाती हैं और जुनून ऐसा कि एशियन गेम्स 2018 में वो रिकॉर्ड कायम कर दिया, जो आज तक कोई न कर पाया।
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सीमा पूनिया
हम बात कर रहे हैं डिस्कस थ्रोअर 35 वर्षीय सीमा पूनिया की, जिन्होंने 62.26 मीटर डिस्कस थ्रो कर कांस्य पदक पर कब्जा किया। यह उनका सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। सीमा ने पिछले एशियाड में इससे कम दूरी पर गोल्ड जीता था। बेशक सीमा पूनिया को डिस्कस थ्रो में भले ही कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा, लेकिन वह लगातार चार राष्ट्रमंडल खेलों, दो एशियाड और तीन ओलंपिक में खेलने वाली देश की पहली खिलाड़ी बन गईं। सीमा ने राष्ट्रमंडल खेलों में चार और एशियाड में दो पदक जीते हैं। हालांकि ओलंपिक में वह तमगा नहीं जीत पाई हैं। सीमा देश के लिए खेलने के साथ ही पुलिस की नौकरी और परिवार की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं।
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सीमा पूनिया
27 जुलाई1983 को हरियाणा के सोनीपत जिले के मुरथल शहर के गांव खेवड़ा में जन्मी 35 वर्षीय एथलीट पूनिया सीमा पूनिया डिस्कस थ्रो खिलाड़ी हैं। वह अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। सीमा ने राष्ट्रमंडल खेलों में 2006 में रजत, 2010 में कांस्य, 2014 में रजत और 2018 में रजत जीता है। 2014 इंचियोन एशियाड में स्वर्ण पदक जीता था। सीमा पूनिया की शादी यूपी के मेरठ में सकौती क्षेत्र के गांव टांडा निवासी अंकुश पूनिया से वर्ष 2010 में हुई थी। सीमा पूनिया स्पोर्ट्स कोटे से करनाल में इंस्पेक्टर हैं। वह पति अंकुश पूनिया के साथ मोदीपुरम की शिव कॉलोनी में रह रही हैं। उनके पति अंकुश पूनिया भी डिस्कस थ्रो के खिलाड़ी हैं।
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सीमा पूनिया
- फोटो : फाइल फोटो
सीमा ने 11 साल की उम्र से एथलेटिक्स में प्रवेश कर लिया था। उन्होंने 17 साल की उम्र में विश्व जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में चक्का फेंक में स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन डोपिंग का दोषी पाये जाने के कारण उनका पदक छीन लिया गया था। सीमा ने स्यूडोफेडरिन ली थी, जिसे जुकाम के उपचार के लिए लिया जाता है। तब आईएएएफ के नियमों के अनुसार केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। इसके बाद उनका करियर उतार चढ़ाव भरा रहा, पर सीमा ने हिम्मत नहीं छोड़ीद्घ पिता विजयपाल आंतिल, मां प्रकाशवती सहित दोनों भाई अमित पाल एवं आनंदपाल सीमा की सफलता से बेहद खुश है।
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सीमा पूनिया
इस वजह से चूकी गोल्ड मेडल से
सीमा पूनिया अपने फिटनेस के दम पर गोल्ड मेडल के लिए प्रयास कर रही थी, लेकिन इस बार भी वह चूक गईं। यदि वह इस बार गोल्ड मेडल ले आती तो पूर्व में एशियन गेम्स की तरह इस बार भी गोल्ड मेडल उनके खाते में जाता। सीमा ने महिला वर्ग में डिस्कस थ्रो में अच्छा प्रदर्शन किया है। सिल्वर मेडल के लिए दो प्वाइंट और गोल्ड मेडल लाने के लिए तीन पाइंट से वह चूक गई। बता दें कि सीमा पूनिया भी अपनी डाइट का बेहद ध्यान रख रही हैं। एक दिन में वह 15 अंडे और डेढ़ किलो चिकन के अलावा सोयाबीन, दाल, फल और दूध का सेवन करती हैं।
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सीमा पूनिया
कांस्य जीतना भी बड़ी बात: अंकुश
सीमा पूनिया के पति एवं उनके कोच रहे अंकुश पूनिया का कहना है कि सीमा की फिटनेस में कोई कमी नहीं है। इस बार उन्होंने कॉमनवेल्थ से भी अच्छी फिटनेस के साथ थ्रो किया है, एशियन गेम्स में पूर्व में गोल्ड मेडल जीता था, इस बार कांस्य जीता है, कांस्य जीतना भी बड़ी बात है। वह लगातार देश को मेडल ला रही है, जबकि सरकार इसके प्रति कोई गंभीरता नहीं दिखाती। अंकुश पूनिया ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को खिलाड़ियों को खुलकर मौका देना चाहिए।
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सीमा पूनिया
रोलर चलाकर करती हैं अभ्यास
बाजुओं की मजबूती के लिए खूब रोलर चलाया। खूब रनिंग की। खाने में परहेज किया। महत्वपूर्ण यहां यह था कि मैं खुद को जवां महसूस कर रही थी, जिससे आत्मविश्वास बढ़ा। वहीं अपने पुराने वीडियोज को देखा कि कहां चूक हो रही थी। मेडिटेशन कर मानसिक तौर पर मजबूत बनाया फिर अभ्यास से खुद को बेहतर बनाया।
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सीमा पूनिया
ये है सीमा पूनिया की उपलब्धियां
2000: जूनियर वर्ल्ड चैम्पियनशिप में प्रथम गोल्ड 2001: जूनियर एशिया चैम्पियनशिप में रजत गुरुनई में जीता। 2002: जूनियर वर्ल्ड चैम्पियनशिप वेस्टइंडीज में कांस्य पदक जीता। 2002: जूनियर एशियन चैम्पियनशिप बैंकाक में कांस्य पदक जीता। 2004: ओलंपिक में 14वीं रैंक आयी। 2006: कॉमनवेल्थ गेम्स मेलर्बन में सिल्वर मेडल जीता 2009: वर्ल्ड चैम्पियनशिप जर्मनी में वर्ल्ड रैकिंग 15वीं रही। 2010: दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता।
2012: लंदन ओलंपिक 12वीं रैंक 2013: एशियन चैम्पियनशिप पुणे में पांचवी रैंक रही। 2014: स्कॉटलैंड में कॉमनवेल्थ गेम्स में 1 अगस्त को रजत पदक जीता 2014: इंचियोन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता 2018- आस्ट्रेलिया गोल्ड कोस्ट में कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता