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देखिए एक जंगल, जहां चलता है 'राजमंगल' का राज...दशहत में रहती हैं, माया, हेमा और पार्वती

Fri, 05 Oct 2018 01:30 PM IST
न्दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर
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छतबीड़ जू
हम आपको दिखा रहे एक ऐसा जंगल जहां बस राजमंगल का राज चलता है और माया, हेमा, पार्वती दहशत में रहती हैं। उसकी आवाज सुनकर सब थरथर्राने लगते हैं।
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छतबीड़ जू
सर्कस में आपने हाथियों के तमाम करतब देखे होंगे। फिल्म हाथी मेरे साथी में भी हाथियों ने कमाल का काम किया था, लेकिन क्या आप किसी ऐसे हाथी के बारे में जानते हैं या फिर सुना है, जिसे पहले शूट एट साइट के आर्डर दिए गए हों और सजा माफ होने के बाद लोगों का मनोरंजन करता हो। जी हां छतबीड़ जू में राजमंगल नाम का एक मेल हाथी है, जिसे हरियाणा के चीफ वाइल्ड वार्डन ने उसके आतंक से परेशान होकर गोली मारने के आदेश दिए थे, लेकिन आज वह हजारों पर्यटकों का मनोरंजन करता है। कभी पर्यटकों को सेल्फी देने के लिए बाड़ा के पास किनारे आ जाता है, तो कभी पानी अपनी सूंड में भरकर लोगों के ऊपर फेंकता है।  

 
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छतबीड़ जू
राजमंगल के बाड़े में आते ही हंगामा शुरू
राजमंगल बाड़े में आता तो हंगामा शुरू हो जाता है। ‘माया’ की माया भी उस पर बेअसर है और हेमा की अदाएं भी उसे नहीं रोक पातीं। तभी तो राजमंगल को छतबीड़ जू का सबसे खतरनाक हाथी कहा जाता है। 54 साल के राजमंगल के साथ यहां तीन हथनियां हैं, पार्वती, माया और हेमा। राजमंगल को छतबीड़ जू में लाकर अनुशासन में रखने की लाख कोशिशें कीं पर कामयाब नहीं हो पाईं। बाड़े में लाने पर वह चिंघाड़ता है और उठापटक करता है। रूठते भी हैं राजमंगल अगर राजमंगल की डाइट उसके पसंद का न मिले तो उसका गुस्सा उफान पर होता है। वह ढाई क्विंटल तो चारा खा जाता है और उसके साथ दस किलो डाइट भी लेता है। इस डाइट में मक्की, बाजरा, जौ और गेहूं के साथ भीगे चने और केले शामिल हैं। वह लहसुन और अदरक का भी शौकीन है।

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छतबीर जू में लॉयन सफारी
1997 में शूट एट साइट के दिए थे आदेश
राजमंगल 1997 में रोहतक से छतबीड़ चिड़ियाघर में लाया गया था। छतबीड़ जू के एक अधिकारी ने बताया कि वह खतरनाक था और रोहतक में आतंक का पर्याय बन गया था। उसे मारने के आदेश दिए गए थे। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के दखल के बाद यह आदेश वापस लिए गए और उसे छतबीड़ जू में लाया गया।
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छतबीर जू में लॉयन सफारी
बेटे की मौत के बाद खूंखार हो गया राजमंगल
राजमंगल और हेमा के बीच संबंध से उन दोनों के एक बेटा हुआ था। जिसका नाम वीरू रखा गया था। करीब आठ साल पहले वीरू को चारे में बैठे सांप ने काट लिया था जिससे उसकी मौत हो गई। बेटे की मौत के बाद राजमंगल ज्यादा खूंखार हो गया। साथ ही उदास भी रहता है।  मॉर्निंग वाक के समय सड़कों पर चलते समय राजमंगल के सामने कोई नहीं आता सुबह जू खुलने से पहले राजमंगल मार्निंग वाक और एक्सरसाइज भी करता है। जब उसे मॉर्निंग वॉक पर जू की मने सड़कों पर महावत लेकर निकलते हैं, तो जू की सड़कें खाली करवा दी जाती हैं, क्योंकि सड़कों पर राजमंगल को अकेला घूमना पसंद है। वह नहीं चाहता कि उसके अलावा कोई दूसरा व्यक्ति मेन सड़क पर घूमने के लिए निकले।
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छतबीड़ जू - फोटो : amar ujala
नियम और शर्तों पर रखें जाते हैं जू में हाथी
छतबीड़ जू उन सात चिड़ियाघरों में से एक है जिसमें हाथी देखने को मिलते रहेंगे। सेंट्रल जू अथॉरिटी के आदेश के अनुसार देश के किसी भी चिड़ियाघर में हाथी नहीं रखे जाएंगे क्योंकि वहां उन्हें लोहे की जंजीरों से बांध कर रखा जाता है। इससे वे घायल हो जाते हैं और इनकी देखभाल भी उचित ढंग से नहीं हो पाती। चिड़ियाघरों ने इस आदेश के खिलाफ याचिका दाखिल की थी और बाद में सात चिड़ियाघरों को नियम और शर्त के अनुसार हाथी रखने की अनुमति मिली थी। उसमें से एक छतबीड़ है।
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