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बहन ने जान देकर बचाई थी 360 जिंदगियां, 22 साल बाद भाई ने दिया रक्षाबंधन पर तोहफा

Tue, 21 Aug 2018 09:44 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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नीरजा भनोट की कहानी - फोटो : File Photo
बहन ने अपनी जान देकर 360 लोगों की जिंदगी बचाई थी, उस हादसे के 22 साल बाद भाई ने उसे रक्षाबंधन के मौके पर एक ऐसा तोहफा दिया, देखकर छलक जाएंगे आंखें।
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नीरजा भनोट
हम बात कर रहे हैं नीरजा भनोट की, जिनकी यादों को संजोते हुए भाई अनीश भनोट ने एक किताब लिखी डाली है। अशोक चक्र विजेता नीरजा भनोट पर आधारित किताब ‘नीरजा भनोट, द स्माइल ऑफ करेज’ का विमोचन रविवार को चंडीगढ़ सेक्टर-10 स्थित गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी में किया गया। इसका विमोचन नीरजा के भाई अनीश भनोट की ओर से लिखी गई पुस्तक का विमोचन चीफ  गेस्ट नीरजा के सबसे बडे़ भाई अखिल भनोट ने किया। इस मौके पर बलजीत परमार और वीपी प्रभाकर गेस्ट आफ ऑनर थे।
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5 सितंबर को हाईजेक हुआ प्लेन और नीरजा भनोट
किताब का फारवर्ड पूर्व आईएएस अधिकारी विवेक अत्रे ने लिखा है। इस मौके पर एक किस्सा याद करते हुए अनीश भनोट ने बताया कि नीरजा एक बार बीमार पड़ गई। किसी ने कहा कि इसे सिर्फ फ्रूट खिलाओ...मम्मी डैडी मुझसे बोले कि फ्रूट नीरजा के लिए हैं, तुम मत खाना। इतना कहकर मम्मी डैडी चले गए। मेरी नजरें फ्रूट पर थीं। मैने नीरजा से कहा कि तू ऐसे नहीं ठीक होने वाली, भगवान का भजन करना होगा। नीरजा उठी और मेरे साथ भजन करने लगी। जैसे ही भजन खत्म होता तो मैं कहता कि प्रसाद चढ़ाओ और बांटो।

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नीरजा
अखिल भनोट ने बताया कि नीरजा बचपन से ही साहसी थी। कालेज के दिनों में वह नीरजा को छोड़ते हुए जाते थे। एक दिन कालेज जा रहे थे। रास्ते में देखा कि एक आदमी औरत की पिटाई कर रहा था, नीरजा ने फटाफट स्कूटर रुकवाया और वहां पहुंचकर आदमी को पीछे से पकड़कर धकेल दिया। अखिल भनोट ने बताया कि नीरजा की हंसी रुकती ही नहीं थी। वह बताते हैं कि मम्मी और नीरजा अक्सर छुट्टियों में उनके पास आ जाते थे। उस समय उनके पास स्कूटर होता था। जब मम्मी और नीरजा आती तो वह एक रिक्शा लेकर चले गए। ट्रेन से दोनों का सामान उठाकर रिक्शे पर लादा और जैसे ही वह ड्राइविंग सीट पर बैठे तो नीरजा की हंसी फूट पड़ी। वह लगातार हंसती जा रही थी और लोग देखे चले जा रहे थे।
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बहादुर बेटी नीरजा भनोट
अनीश भनोट ने कहा कि 108 पन्नों की इस पेपरबैक किताब के दस अध्याय (चैप्टर्स) हैं। इनमें नीरजा के जीवन में घटित घटनाओं का खूबसूरती से जिक्र है। नीरजा के बचपन से लेकर प्लेन हाईजैक की घटनाओं को इस किताब में लिखा गया है। इस किताब को लिखने का कारण बताते हुए अनीश भनोट ने कहा कि दरअसल अकसर सोशल मीडिया में लोग उनसे नीरजा के व्यक्तित्व के विषय में पूछा करते थे। नीरजा अपने बचपन में कैसी थी।
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बहादुर बेटी नीरजा भनोट
नीरजा के निजी जीवन के बारे में, वह कैसे मॉडल बनी? क्या उनका वैवाहिक जीवन वाकई विफल था? उन हाईजैकर्स का क्या हुआ ? नीरजा हमें क्या संदेश देती है ? कोई अपने आप को नीरजा में कैसे ढाल सकता है ? नीरजा भनोट अवार्ड कैसे फंड होते हैं? अनीश ने बताया कि ऐसे सभी सवालों के जवाब उन्होंने अपनी इस किताब में दिए हैं। अनीश भनोट ने बताया कि यह किताब पूरी तरह से नीरजा पर आधारित है। उसके चंडीगढ़ के दिनों, उसका मुंबई पलायन, वह कैसे मॉडलिंग में आई, उसका वैवाहिक जीवन और आगे क्या हुआ, पैन एम में शामिल होना, हाईजैक की घटना आदि। अनीश ने बताया कि 32 पन्नों में नीरजा के दुर्लभ चित्रों के साथ साथ उसके द्वारा लिखे पत्र और नोट्स भी शामिल किए गए हैं।
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बहादुर बेटी नीरजा भनोट
विवेक अत्रे अपने फारवर्ड में लिखते है, ‘नीरजा न सिर्फ अब तक वर्तमान के युवाओं, विशेषकर युवा महिलाओं के लिए शक्ति और प्रेरणा का स्त्रोत है बल्कि सच्चे मायनों में राष्ट्रीय प्रतीक है। अनीश हर भारतीय के लिए नीरजा का प्रभावशाली व्यक्तित्व और करीब लाए हैं। उनके द्वारा दिया गया विस्तारपूर्वक वर्णन जैसे कि 12 वर्ष की आयु में दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना और राजेश खन्ना के प्रति लगाव, हमने सुना था। इनके बारे में कम ही जानते थे। किताब में छोटी-छोटी बातों के ऐसे कई वृतांत हैं जैसे बचपन में छत पर सोना, बच्चों की तरह छोटी-छोटी पेचिदगियों में उलझना।
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नीरजा भनोट
जान की लगा दी थी बाजी
22 वर्षीय नीरजा भनोट पैन एम एयरलाइन में एयर होस्टेस थीं। नीरजा ने सितंबर 1986 को कराची एयरपोर्ट में घटित पैन एम प्लैन के हाईजैक होने पर अपनी जान की बाजी लगाकर कई लोगों की जान बचाई थी। 5 सितंबर, 1986 को कराची एयरपोर्ट पर चार हथियारबंद आतंकवादियों ने प्लेन पर हमला बोल दिया था। नीरजा के अलर्ट किए जाने पर पायलट, फ्लाइट इंजीनियर मौके से भाग निकले। क्रू में सबसे वरिष्ठ होने के नाते नीरजा ने अपनी जान को खतरे में डालकर प्लेन में उपस्थित सभी यात्रियों की जिम्मेदारी ली। जब हाईजैकर्स तीन बच्चों पर गोलियों बरसाने वाले थे तो नीरजा उनका कवच बनीं और उनकी दनदनाती गोलियों का शिकार बन गईं।
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