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एक आइडिया और बना दिया कमाल का पेन, स्याही खत्म...मिट्टी में फेंको...बन जाएगा पौधा

Wed, 28 Oct 2020 01:35 PM IST
ajay kumar आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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संस्था ने बनाया खास पेन। - फोटो : अमर उजाला
दोबारा इस्तेमाल (सिंगल यूज पेन) में न आने वाले पेन की रिफिल खत्म होने के बाद उसे कूड़े में फेंक दिया जाता है, जो प्लास्टिक कचरे के रूप में एक बड़ा खतरा बन चुका है। लेकिन एक संस्था ने इसका बेहतरीन विकल्प निकल लिया है। अब अगर आपके पेन की रिफिल खत्म हो जाती है तो उससे होगा क्या, आइए यह भी जान लेते हैं...
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- फोटो : अमर उजाला
स्वर्ण मनी यूथ वेलफेयर नाम की एक संस्था है। इसने प्लास्टिक कचरे को गंभीरता से लिया है और इसका विकल्प तैयार कर दिया है। संस्था से जुड़े युवाओं ने अखबार के पन्ने से एक ऐसा पेन तैयार किया है, जो खुद से नष्ट हो जाएगा और बहुत कम मात्रा में प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करेगा। यदि उस पेन की रिफिल निकालकर मिट्टी या गमले में फेंकते हैं तो वह पौधे में बदल जाएगा। दरअसल, पेन के हिस्से में पौधों के बीज भरे हैं। संस्था के सदस्य रोहित कुमार व प्रदीप कुमार वर्मा ने बताया कि उनका मकसद प्लास्टिक के पेन से फैलने वाले कचरे को कम करना है।
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- फोटो : अमर उजाला
अखबार के पन्ने से तैयार पेन बाजार में बिकने वाले पेन के मुकाबले 90 फीसदी कम प्लास्टिक का कचरा पैदा करते हैं। उन्हें यह आइडिया रूस से मिला। साल 2018 में रोहित कुमार वर्ल्ड यूथ फेस्टिवल के तहत रूस गए थे। वहां पर उन्होंने पाया कि खुद से नष्ट होने वाले पेन का इस्तेमाल किया जाता है। उसके बाद वे उसे यहां पर लागू करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन वे इस पर कामयाब नहीं हुए। काफी कोशिश के बाद आखिरकार वे इस साल तैयार करने में जुट गए हैं। पेन की कीमत पांच रुपये है। यदि कोई पेन खरीदना चाहता है तो वह संस्था के फेसबुक पेज पर जाकर संपर्क कर सकता है।

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- फोटो : अमर उजाला
यू ट्यूब से पेन बनाना सीखा
प्रदीप ने बताया कि पेन के निर्माण का तरीका उन्होंने यूट्यूब से सीखा। मात्र पांच मिनट के भीतर उन्होंने इस हुनर को सीख लिया था। उसके बाद इसका उन्होंने प्रयोग करना शुरू किया। रोहित ने बताया कि बीज उन्हें आर्गेनिक शेयरिंग की ओर से मिल रहे हैं। किसी में पालक के बीज हैं तो किसी में गोभी के। हर पेन में किसी न किसी पौधे का बीज जरूर है।
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- फोटो : अमर उजाला
पेन का कचरा 91 फीसदी रिसाइकल नहीं होता
एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल 160 से 240 करोड़ प्लास्टिक पेन बाजार में आते हैं। जिसकी वजह से प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है। इसका 91 फीसदी प्लास्टिक कचरा रिसाइकल नहीं होता। सीपीसीबी ने प्लास्टिक वेस्ट पर जारी 2018 -19 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया था कि उस वर्ष देश में 33,60,048 टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न हुआ था। टॉक्सिक लिंक द्वारा जारी एक स्टडी सिंगल यूज प्लास्टिक-द लास्ट स्ट्रॉ के अनुसार केवल एक महीने में केरल के ही स्कूल छात्र करीब 1.5 करोड़ पेन को फेंकते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
इस्तेमाल दीए को भी देते हैं नया रूप
रोहित कुमार ने बताया कि दीपावली पर हर साल लोग दीए का इस्तेमाल करने के बाद उसे फेंक देते हैं। दीपावली के बाद संस्था घर-घर जाकर दीए इकट्ठा करती है और उन्हें साफ करने के बाद उस पर पेंट करते हैं। उसके बाद उस दीए को वे बेचते हैं। बेचने के बाद जो पैसा आता है, उसका इस्तेमाल वे जरूरतमंदों की मदद में करते हैं। 
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