सिर्फ 5 सेकेंड में 61 लोगों की जान चली गई। ट्रेन मौत बनकर आई और रावण को जलता देखकर लोगों को कुचलते हुए निकल गई। मंजर देखकर लोग सहम गए, इधर उधर भागने लगे। किसी को समझ नहीं आया कि ये क्या हो गया। तस्वीरों में देखिए, कैसे हुआ हादसा।
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अमृतसर ट्रेन हादसा
अमृतसर में शुक्रवार को जो हुआ, उसने देश भर के लोगों को हिला दिया। दशानन का दहन देखने पहुंचे लोगों ने सोचा भी नहीं होगा कि आज उन पर कैसी आफत टूटने वाली है। रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर लोग रावण दहन देख रहे थे। आतिशबाजी हो रही थी। लाउडस्पीकर का शोर चारों ओर था। सब ठीक चल रहा था। अचानक ट्रेन उनके इतने करीब आ गई कि संभलने का मौका तक नहीं मिला।
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अमृतसर ट्रेन हादसा
ट्रेन के लगातार बजते हॉर्न की आवाज लाउडस्पीकर और लंकेश के पटाखों की गूंज में दब गई। ट्रैक पर खड़े लोग जब तक संभलते, तब तक देर हो चुकी थी। लोगों के ऊपर से ट्रेन दनदनाती हुई गुजर गई और अपने पीछे छोड़ गई ऐसी चीखें, जो कानों में गूंजती रहेंगी। बेरहम ट्रेन की चपेट में आकर किसी का भाई चला गया तो किसी के घर का इकलौता चिराग बुझ गया।
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अमृतसर ट्रेन हादसा
हादसे में अपनों को गंवाने वाले लोग नेताओं और आयोजकों को कोस रहे थे। सबकी जुबान पर एक ही सवाल था कि रिहायशी एरिया से गुजर रहे रेलवे ट्रैक के बराबर में किसने पुतला दहन की अनुमति दी। दुखद तो यह है कि हादसे से रेलवे ने अपना पल्ला झाड़ लिया है।
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अमृतसर ट्रेन हादसा
एक आलाधिकारी के अनुसार, मौके पर ट्रेन अपनी निर्धारित गति और हॉर्न बजाती हुई गुजर रही थी और फाटक भी बंद था। व्यवस्था बनाने का काम सिविल पुलिस का था। उन्हें ही यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि लोग ट्रैक पर खड़े न हों, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आसपास वाले ट्रैक पर भी लोग थे, जो हादसे के बाद हटे।
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने एक बयान में कहा कि रेलवे पटरियों के निकट हो रहे दशहरा कार्यक्रम के बारे में विभाग को सूचित नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि यह हादसा दो स्टेशनों-अमृतसर एंव मनावाला के बीच हुई न कि रेलवे फाटक पर।