बचपन में पोलियोग्रस्त हुई तो चिंतित मां से बोली, मां, एक दिन मैं उड़ के दिखाउंगी। वहीं, बेटी आज सफलता के आसमान पर पहुंच चुकी है। पढ़ें प्रोफाइल।
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प्रियंका नैय्यर
- फोटो : फाइल फोटो
बात हो रही है पंजाब के दीनानगर की प्रियंका नैय्यर की। प्रियंका नैय्यर अब मिनिस्ट्री आफ माइनिंग के तहत आते जवाहर लाल नेहरू एल्युमीनियम रिसर्च डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर में बतौर साइंटिस्ट सिलेक्ट हुई। वे 1 सितंबर को अपनी पोस्ट संभालेगी।
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प्रियंका नैय्यर
- फोटो : फाइल फोटो
दीनानगर स्थित अपने घर में प्रियंका के पिता सुरेंद्र मोहन नैय्यर और माता अंजु बाला नैय्यर ने बताया कि उनकी बेटी नौ महीने की थी जब उसे पोलियो हो गया। वे लोग बेटी के भविष्य को लेकर चिंतित रहने लगे। इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी मगर कुछ बात नहीं बनी। आज बेटी ने साइंटिस्ट बनकर उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
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प्रियंका नैय्यर
- फोटो : फाइल फोटो
पिता सुरेंद्र मोहन ने बताया कि जब वह बेटी को स्कूल में दाखिल करवाने गए तो प्रिंसीपल कमलेश आनंद ने उनका हौसला बढ़ाते हुए कहा आप चिंता ना करें आपकी बेटी शॉर्प माइंड है और जरूर कुछ बनेगी। एसएस डीएवी स्कूल से दसवीं करने के बाद और शांति देवी आर्य महिला कालेज दीनानगर से बीएससी कंप्यूटर साइंस की।
प्रियंका पढ़ाई में हमेशा अव्वल रही। शारीरिक विकलांगता के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी। दसवीं में 87 प्रतिशत नंबर हासिल किए। साल 2007 में एमएससी फिजिक्स में 78 प्रतिशत अंक लेकर यूनिवर्सिटी मेरिट में स्थान प्राप्त किया। उसने चाइना की नैनजिंग यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप लेकर इस वर्ष अपनी पोस्ट डाक्टरेट पूरी की।