इस वर्ष अक्षय तृतीया पर मंगल जयंती योग बन रहा है। यह बहुत ही शुभ योग माना गया है। यह योग 24 साल बाद आ रहा है। सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने इस बात की जानकारी दी। रिपोर्टः नीरज कुमार
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अक्षय तृतीया पर 24 साल बाद अद्भुत शुभ योग
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बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि अक्षय तृतीया 21 अप्रैल, मंगलवार को है। अक्षय तृतीया कृतिका नक्षत्र या रोहिणी नक्षत्र में मनाना शुभ है। अगर कृतिका नक्षत्र के साथ रोहिणी नक्षत्र का और सौभाग्य योग का संयोग हो तो पर्व का महत्व बढ़ जाता है। सतयुग का प्रारंभ कृतिका नक्षत्र से हुआ है।
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इस वर्ष कृतिका नक्षत्र और रोहिणी नक्षत्र का संयोग कर्क राशि में बृहस्पति, अश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में होने के कारण मंगल जयंती योग बन रहा है। यह मंगल जयंती योग 24 साल बाद आ रहा है।
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वैसे तो यह संयोग सभी के लिए शुभ है। लेकिन कर्क राशि और बृष राशि वालों के लिए बहुत ही शुभ है। आम जनता के लिए यह वर्ष शुभ कारक है। यह स्वयं सिद्ध मुहूर्त है। इस पर्व में किया गया जप, तप, ध्यान और पूजा व शुभ कार्यों के लिए किया पुण्य अक्षय हो जाता है।
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सेक्टर-15 के जय श्री राम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख स्वामी राम बहादुर मिश्र का कहना है कि जल से भरा कलश, पंखा, जूता, भूमि और गोदान का महत्व है। अक्षय तृतीया को गंगा स्नान करना पुण्यकारी माना गया है। जिसके कुंडली में पितर दोष है, वे पितरों का पिंडदान, तर्पण कर सकते हैं।
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सूर्योदय सुबह पांच बजकर 53 मिनट से सूर्यास्त छह बजकर 50 मिनट तक शुभ समय है। दोपहर बाद तीन बजे से चार बजकर 30 मिनट तक राहुकाल है। राहुकाल में खरीदारी और दान करना शुभ नहीं है। लोगों को इस काल से बचकर ही काम करना चाहिए।
सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के मुख्य पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री, देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी लाल बहादुर दुबे के अनुसार अक्षय तृतीया को सोना खरीदना, जमीन खरीदना, गृह प्रवेश, नया व्यापार करना, तीर्थयात्रा बहुत ही शुभ माना है।